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Ghaziabad News: करवाचौथ के दिन महिला की हत्या में पड़ोसी युवक दोषी करार

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गाजियाबाद। दस वर्ष पूर्व इंदिरापुरम क्षेत्र में करवाचौथ के दिन साइकिल कारोबारी धर्मपाल सैनी की पत्नी राजबाला सैनी की हुई हत्या के मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश भरत सिंह यादव की अदालत ने पड़ोसी हरिओम शर्मा को हत्या और लूटपाट का दोषी करार दिया है। दोष तय होने के बाद अब अदालत में बृहस्पतिवार को सजा पर बहस और सुनवाई होगी।
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अदालत से मिली जानकारी के अनुसार शक्ति खंड-1 के फ्लैट नंबर 46बी में रहने वाले धर्मपाल सैनी इंदिरापुरम के न्याय खंड दो में साइकिल एजेंसी चलाते थे। घटना वाले दिन 30 अक्तूबर 2015 की सुबह वह रोज की तरह अपनी एजेंसी पर चले गए थे। उनकी बेटी नेहा स्कूल और बेटा रोहित काॅलेज गए थे। घर पर अकेली मौजूद राजबाला हमेशा की तरह दोपहर में बेटी को स्कूल से लेने जाने वाली थीं, लेकिन वह स्कूल नहीं पहुंचीं। जब नेहा ने स्कूल के शिक्षक के फोन से मां को कॉल किया तो उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। इसके बाद नेहा ने पिता धर्मपाल को सूचना दी और उन्हें स्कूल बुलाया।

बेटी को स्कूल से घर पहुंचने पर बाहर से बंद था फ्लैट
धर्मपाल बेटी को साथ लेकर घर पहुंचे तो देखा कि फ्लैट के मेन गेट की कुंडी बाहर से लगी हुई थी। पिता और बेटी ने कुंडी खोलकर अंदर प्रवेश किया तो बेडरूम में राजबाला खून से लथपथ पड़ी मिलीं। उनका मुंह तकिये से ढका हुआ था और दोनों हाथ पैर रस्सी से बंधे थे। तुरंत उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। धर्मपाल ने तत्काल पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की कई टीमें जांच में लगाई गईं। जांच के दौरान पुलिस ने पड़ोस में रहने वाले हरिओम शर्मा को गिरफ्तार किया। पूछताछ में हरिओम ने बताया कि उसने घर में घुसकर पहले लूटपाट की कोशिश की और विरोध करने पर धारदार हथियार से राजबाला की हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था और आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत ने हरिओम को दोषी ठहराया है।
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घटना वाले दिन राजबाला करवाचौथ का व्रत रखी थीं और पति की लंबी आयु के लिए प्रार्थना कर रही थीं। घर के ड्राइंग रूम में चाय के दो कप और बिस्किट मिलने से स्पष्ट हुआ कि आरोपी घर में बैठा था। किसी से रंजिश न होने के कारण परिवार के लिए यह घटना और भी पीड़ादायक रही।
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