गाजियाबाद। शहर ही नहीं प्रदेश से भी 15 वर्ष पुराने डीजल वाहन हटेंगे। आरटीओ ने इस संबंध में कवायद शुरू कर दी है। गाजियाबाद में ऐसे वाहनों को एनओसी नहीं दी जाएगी। इन सभी वाहनों का पंजीयन निरस्त कर इन्हें स्क्रैप में बदला जाएगा।
एआरटीओ (प्रशासन) विश्वजीत सिंह ने बताया कि 15 वर्ष पुराने डीजल के जितने वाहन होते हैं , उनके लगातार सड़काें पर दौड़ते रहने से सबसे ज्यादा प्रदूषण होता है। नियमों के तहत इन डीजल वाहनों को विभाग से एनओसी नहीं मिलेगी, जो वाहन चालक एनओसी लेने आएगा, उसका पंजीयन निरस्त किया जाएगा। पूर्व में वाहन चालक गाजियाबाद से इन वाहनों की एनओसी लेकर अन्य जनपदों में जाकर उसे बेचते थे। इसलिए निर्णय लिया गया कि ये वाहन सड़कों पर चलेंगे ही नहीं।
3000 डीजल वाहनों में 25 सीज
गाजियाबाद। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल के आदेश के बाद परिवहन विभाग ने 10 वर्ष पुराने डीजल और 15 वर्ष पुराने पेट्रोल वाहनों को सड़कों से हटाना शुरू कर दिया है। अब तक 25 वाहनों को सीज कर थानों में खड़ा कराया गया है।
इस बीच चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाने से सभी वाहनों को सड़कों से हटाने के काम पर ब्रेेक लग गया है। दिल्ली समेत नेशनल कैपिटल रीजन में बढ़ते प्रदूषण पर एनजीटी की सख्ती पर शासन के निर्देश पर कार्रवाई की जा रही है। जनवरी के पहले सप्ताह से ही इस दिशा में काम शुरू कर दिया गया, लेकिन काम ने गति पकड़ी ही थी कि चुनाव की घोषणा हो गई।
इसके साथ ही स्टाफ भी चुनाव ड्यूटी में लग गया, जिससे काम पर ब्रेक लग गया है। आरटीओ (प्रवर्तन) एके सिंह ने बताया कि टीम बनाकर बीते एक हफ्ते में 25 डीजल वाहनों को पकड़ा गया है। सभी वाहनों के पेपर जब्त कर लिए गए हैं और वाहनों को थानों में खड़ा किया गया है।
चुनाव बाद जोर पकड़ेगा अभियान
परिवहन विभाग के सभी अधिकारी और कर्मचारी इस वक्त विधानसभा चुनाव की तैयारियों में लग गए हैं। आरटीओ एके सिंह ने बताया कि चुनाव पहली प्राथमिकता है। चुनाव ड्यूटी में आने वाले पैरा मिलिट्री फोर्स के जवान एवं अधिकारियों, पर्यवेक्षकों, प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों को वाहन उपलब्ध कराने में विभाग लगा है। चुनाव में डेढ़ हजार वाहनों की जरूरत है।
3000 वाहनों को किया जाना है स्क्रैप
वाहनों को जब्त करने के साथ ही परिवहन विभाग के सामने सबसे बड़ी समस्या इन्हें स्क्रैप करने की है। करीब 3000 डीजल वाहनों को सड़कों से हटाया जाना है लेकिन इन्हें स्क्रैप करने के लिए डंपिंग यार्ड की जगह का इंतजाम नहीं है। इसी के चलते पुलिस थानों में वाहनों को खड़ा करना पड़ रहा है। सड़क से हटाए जाने वाले डीजल वाहनों में कारों और जीप की संख्या अधिक है।