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मौत के साए में हो रहा है मरीजों का इलाज, ढाई साल पहले जर्जर घोषित हुआ एमएमजी अस्पताल

Sat, 09 Jan 2021 04:41 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद

सार

- निस्प्रयोज्य घोषित होने के बाद भी पिछले ढाई साल से उसी भवन में संचालित हो रहा अस्पताल 
- इस वर्ष दो बार गिर चुके हैं छत के प्लास्टर, लखनऊ तक भेजा जा चुका है प्रस्ताव
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muradnagar crematorium accident - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गाजियाबाद में ढाई साल पहले ही जिस भवन को जर्जर घोषित कर उसके ध्वस्तीकरण का प्रस्ताव लखनऊ भेज दिया हो तो जरा सोचिए आज उस भवन की हालत कैसी होगी। शायद मुरादनगर की तरह ही किसी बड़े हादसे का इंतजार एमएमजी अस्पताल के लिए भी किया जा रहा है। इसीलिए दो बार छत का प्लास्टर गिरने के बावजूद शासन, प्रशासन, अस्पताल प्रबंधन सभी एमएमजी अस्पताल की तरफ से आंख मूंदे बैठे हैं। 

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ढाई साल पहले अस्पताल के भवन को निस्प्रयोज्य घोषित कर दिया था। अस्पताल भवन को पीडब्ल्यूडी ने जर्जर घोषित कर इसके ध्वस्तीकरण का प्रस्ताव लखनऊ भी भेजा जा चुका। लखनऊ से इसके इस्टीमेट मांगे भी गए थे मगर बात अभी तक वहीं अटकी हुई है। लिहाजा अभी भी इसी जर्जर भवन में मरीजों का इलाज किया जा रहा है। 

1965 में बना है यह अस्पताल 
एमएमजी अस्पताल काफी पुराना हो गया है। यह अस्पताल 1956 में बना था, जिसमें कई ऐसे भवन हैं जो काफी जर्जर हो चुके हैं। भवनों में आरबीसी की छत और प्लास्टर की ईंटें हैं, वह भी टूटकर गिरती हैं। इसको लेकर तात्कालिक सीएमएस ने प्रशासन को पत्र लिखा था। पूर्व सीएमएस जेके त्यागी ने लगभग 15 पत्र लिखे। इसके बाद सीएमएस रविंद्र राणा के समय भवन को जर्जर घोषित किया गया और लखनऊ प्रस्ताव भेजा गया। इसमें शासन से इस भवन को ध्वस्त करके मल्टीस्टोरी भवन बनाने के निर्देश थे लेकिन अस्पताल को दूसरी जगह शिफ्ट करने की जद्दोजहद कौन करे इसलिए इसी जर्जर भवन में अस्पताल को संचालित किया जा रहा है। अस्पताल के जर्जर होने की समस्या पिछले सात-आठ वर्षों से उठाई जा रही है। 

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अभी तक कई बार गिर चुके हैं छतों के प्लास्टर 

इस वर्ष दो महीने के अंदर अक्तूबर-नवंबर माह में ही एमएमजी अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष और टीबी अस्पताल के छत के प्लास्टर गिर चुके हैं। इससे पहले एमएमजी के अल्ट्रासाउंड कक्ष की दो बार सीलिंग के प्लास्टर गिरे थे। वहीं सीएमएस के बगल में स्थित कार्यालय और फार्मासिस्ट कक्ष की छत के प्लास्टर गिरे थे, जिसमें बड़ी-बड़ी ईंटें भी गिरी थीं। सीएसएस आवास के छत का एक बड़ा सा हिस्सा भी टूटकर गिर चुका है और तो और पुरुष वार्ड के बाहर का छज्जा भी टूटा हुआ है। इन सब की हर बार मरम्मत होती है और कुछ दिनों बाद फिर वही स्थिति रहती है। बरसात में छतों से पानी टपकता रहता है।

इस भवन की मियाद खत्म हुई है। कभी-कभार प्लास्टर गिरते हैं लेकिन भवन मजबूत है। इसको तोड़कर इस पर मल्टीस्टोरी बनाने का प्रस्ताव है। पूर्व की फाइल देखी है लेकिन हमारी तरफ से अभी कोई पत्र नहीं लिखा गया है। - अनुराग भार्गव, एमएमजी सीएमएस

मेरे कार्यकाल में पीडब्ल्यूडी की तरफ से इस भवन को निस्प्रयोज्य घोषित किया जा चुका है। इसको तोड़कर इसकी जगह नए भवन बनाने के लिए लखनऊ से सहमति भी मिल गई थी। भवन को तोड़ने के बाद उसके मलबे का कास्ट और भवन निर्माण में आने वाले खर्चे का इस्टीमेट अलग फॉर्मेट में मांगा गया था। इसके बाद फाइल कहां तक बढ़ी इसकी जानकारी नहीं है। - डॉ. आरेक राणा, पूर्व सीएमएस

इस भवन को लगभग दो साल पहले हमारे विभाग की तरफ से निस्प्रयोज्य घोषित किया जा चुका है। इसके सभी इस्टीमेट शासन को भी भेजे गए थे। इसके आगे की कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग को करनी है। इसको ध्वस्त करके इसकी जगह नया भवन बनना है। - मनीष वर्मा, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर पीडब्ल्यूडी 
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