इस वर्ष दो महीने के अंदर अक्तूबर-नवंबर माह में ही एमएमजी अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष और टीबी अस्पताल के छत के प्लास्टर गिर चुके हैं। इससे पहले एमएमजी के अल्ट्रासाउंड कक्ष की दो बार सीलिंग के प्लास्टर गिरे थे। वहीं सीएमएस के बगल में स्थित कार्यालय और फार्मासिस्ट कक्ष की छत के प्लास्टर गिरे थे, जिसमें बड़ी-बड़ी ईंटें भी गिरी थीं। सीएसएस आवास के छत का एक बड़ा सा हिस्सा भी टूटकर गिर चुका है और तो और पुरुष वार्ड के बाहर का छज्जा भी टूटा हुआ है। इन सब की हर बार मरम्मत होती है और कुछ दिनों बाद फिर वही स्थिति रहती है। बरसात में छतों से पानी टपकता रहता है।
इस भवन की मियाद खत्म हुई है। कभी-कभार प्लास्टर गिरते हैं लेकिन भवन मजबूत है। इसको तोड़कर इस पर मल्टीस्टोरी बनाने का प्रस्ताव है। पूर्व की फाइल देखी है लेकिन हमारी तरफ से अभी कोई पत्र नहीं लिखा गया है। - अनुराग भार्गव, एमएमजी सीएमएस
मेरे कार्यकाल में पीडब्ल्यूडी की तरफ से इस भवन को निस्प्रयोज्य घोषित किया जा चुका है। इसको तोड़कर इसकी जगह नए भवन बनाने के लिए लखनऊ से सहमति भी मिल गई थी। भवन को तोड़ने के बाद उसके मलबे का कास्ट और भवन निर्माण में आने वाले खर्चे का इस्टीमेट अलग फॉर्मेट में मांगा गया था। इसके बाद फाइल कहां तक बढ़ी इसकी जानकारी नहीं है। - डॉ. आरेक राणा, पूर्व सीएमएस
इस भवन को लगभग दो साल पहले हमारे विभाग की तरफ से निस्प्रयोज्य घोषित किया जा चुका है। इसके सभी इस्टीमेट शासन को भी भेजे गए थे। इसके आगे की कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग को करनी है। इसको ध्वस्त करके इसकी जगह नया भवन बनना है। - मनीष वर्मा, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर पीडब्ल्यूडी