मुरादनगर श्मशान घाट पर रहनेे वाले पुजारी
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गाजियाबाद के मुरादनगर श्मशान घाट हादसे की जांच करने पहुंची एसआईटी के सामने वहां के पुजारी नरेश कुमार ने निर्माण कार्य में हुए भ्रष्टाचार की पोल खोल दी। उन्होंने टीम को बताया कि जब लिंटर खुला था तो बीच में दरार पड़ी हुई थी। इसकी शिकायत जेई से की गई तो उसने धमकाना शुरू कर दिया था।
जेई ने कहा था कि तुम्हारा जो काम है, वही करो, ज्यादा हस्तक्षेप मत करो। पुजारी ने बताया कि निर्माण कार्य बहुत ही घटिया तरीके से किया गया था। लेकिन जेई की धमकी के कारण वह चुप रहे। एसआईटी ने पुजारी के बयान को दर्ज कर लिया है। एसआईटी शुक्रवार दोपहर मुरादनगर बंबा श्मशान घाट हादसे की जांच के लिए पहुंची। टीम के प्रभारी देव रंजन वर्मा और अन्य सदस्यों ने श्मशान के पुजारी नरेश कुमार से 30 मिनट तक अकेले में बात की।
पुजारी ने एसआईटी को बताया कि जब लिंटर खुला था तो बीचों-बीच दरार पड़ी हुई थी। इसकी शिकायत वहां काम कर रहे मिस्त्री और जेई से की गई थी। जेई को कहा गया था कि इसको सही करा दो नहीं तो दिक्कत हो सकती है। इतना कहने पर जेई भड़क उठा और उसने धमकाना शुरू कर दिया। इसके बाद जेई ने दरार वाले स्थान पर सीमेंट लगाकर ढक दिया था।
बराबर में ईंट की दीवार खड़ी कर दी थी, जिससे वह वजन को झेल सके। कमजोर काम के कारण वहां लकड़ी की बल्ली को भी खड़ा कर दिया गया था। पुजारी ने टीम को बताया कि बीच की लकड़ी की बल्ली को हटा दिया गया था, लेकिन बराबर में लगी बल्लियों को नहीं हटाया गया।
बताया कि हादसे वाले दिन भी निर्माण कार्य चल रहा था। पुजारी ने कहा कि श्मशान में पूजा पाठ और अंतिम संस्कार कराने के उन्हें 100 रुपये मिलते हैं। इससे उनके परिवार का खर्च चलता है। उन्होंने कहा कि यदि जेई उनकी बात सुन लेते तो इतने लोगों की जानें नहीं जातीं। इतने घर बर्बाद नहीं होते।