मुरादनगर बंबा रोड श्मशान घाट में गलियारे की छत जमींदोज होने से हुए हादसे में मलबे में दबे लोगों को निकालकर अस्पताल तक पहुंचाने के लिए स्पेशल कॉरिडोर बनाया गया। पुलिस ने एंबुलेंस के लिए दिल्ली-मेरठ हाईवे की एक लेन को खाली करा दिया। इसके चलते महज 18 से 20 मिनट में मुरादनगर से घायलों को लेकर यह एंबुलेंस एमएमजी, यशोदा और सर्वोदय अस्पताल तक पहुंची।
दिल्ली-मेरठ हाईवे पर रैपिड रेल प्रोजेक्ट निर्माण के चलते अक्सर जाम की स्थिति रहती है। मुरादनगर से गाजियाबाद तक का सफर करीब 40 से 45 मिनट में तय होता है। जाम लंबा हो तो यह सफर भी और लंबा हो जाता है। यही वजह रही कि मुरादनगर में हादसे में घायल लोगों को जल्द से जल्द इलाज मिल सके इसके लिए ट्रैफिक पुलिस ने स्पेशल कॉरिडोर बनाया। मुरादनगर से गाजियाबाद तक हाईवे की एक लेन को खाली करा दिया गया। इस लेन को एंबुलेंस के लिए रिजर्व करा दिया गया।
हाईवे की दोनों लेन का सामान्य ट्रैफिक एक ही लेन से चलाया गया। एसपी ट्रैफिक रामानंद कुशवाहा ने बताया कि मुरादनगर से एंबुलेंस के रवाना होते ही गाजियाबाद तक का ट्रैफिक एक लेन पर चला दिया जाता था। उन्होंने बताया कि रास्ते में पड़ने वाले चौराहों-तिराहों का ट्रैफिक एंबुलेंस के आने से पहले ही रोक दिया जाता था। इसकी वजह से एंबुलेंस को अस्पताल तक पहुंचने में आधे से भी कम समय लगा।
दूसरी लेन पर मेरठ तक लगा भीषण जाम
मुरादनगर में हादसे की सूचना पर पुलिस-प्रशासन दौड़ पड़ा। एनडीआरएफ की दो टीमें भी पहुंची। पहले से चल रहे निर्माण कार्य के चलते संकुचित हुए दिल्ली-मेरठ हाईवे को वनवे किया गया तो गाजियाबाद से लेकर मेरठ तक जाम लगा। कई किमी लंबे लगे जाम में हजारों वाहन फंस गए। अधिकारियों को भी घटनास्थल पर पहुंचने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। मंडलायुक्त और आईजी को निकालने में पुलिस के हाथ-पांव फूल गए। पुलिस ने किसी तरह रॉंग साइड और वनवे कराकर अधिकारियों को निकाला।
मुरादनगर से लगा जाम एक तरफ जहां मेरठ बार्डर पारकर गया तो वहीं दूसरी तरफ गाजियाबाद तक वाहनों की कतार लग गई। पुलिस ने मुरादनगर, दुहाई, गंगनहर, मोदीनगर और मेरठ के मोहिउददीनपुर में सिवाल मार्ग और खरखौदा मार्ग आदि सहित कई स्थानों पर रूट डायवर्जन किया। मगर लोगों को जाम से कोई राहत नहीं मिली। देर रात तक वाहन हाईवे पर रेंगते रहे।