आठ मौत के बाद आंसुओं के सैलाब में डूब गया मोहल्ला
गाजियाबाद। बारिश के बहाने श्मशान घाट में आई मौत की आंधी कई घरों को उजाड़ गई। मौत के तांडव पर एक तरफ आसमान रो रहा था तो दूसरी तरफ उखलारसी की संगम कॉलोनी में आंसुओं की बाढ़ आ गई। कोई मां अपने बेटे की अर्थी पर छाती पीट रही थी तो कोई बहन भाई की लाश को देख गश खाकर गिर पड़ी। बदहवाश बच्चे घंटों तक सिसकते रहे। रविवार को यह मंजर जिसने भी देखा आंखें नम हो गईं। एक ही मोहल्ले में आठ लोगों की लाशें पहुंचीं तो हर कोई फफक पड़ा। मोहल्ले का सन्नाटा महिलाओं की चीत्कार से टूट रहा था। लगभग गांव के हर व्यक्ति की आंख में आंसू था। हर व्यक्ति की जुबान पर एक ही बात थी, भगवान यह क्या हो दिया।
गांव उखलारसी की संगम कॉलोनी में दिन की शुरुआत आम दिनों की तरह हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस कॉलोनी में लोगों में आपसी भाईचारा है। लोग एक दूसरे के सुख दुख में साथ रहते हैं। किसी ने नहीं सोचा था कि रविवार का दिन कॉलोनी वालों के लिए काला दिन बन जाएगा। अमर उजाला की टीम संगम कॉलोनी में पहुंची तो वहां मातमी सन्नाटा था। हर घर से रोने की आवाजें आ रही थीं। हादसे में जान गंवाने वाले ओमकार, नीरज, सुनील, ओमप्रकाश, जोगेंद्र, सतीश राठौर, दिग्विजय सोनी के घर आसपास ही हैं। मोहल्ले में मातम छाया हुआ है। लोग एक दूसरे को सांत्वना दे रहे हैं।
- जयराम का परिवार बोला-बहुत बड़ा दर्द है हमारे लिए
जयराम के बेटे प्रदीप और दीपक ने कहा कि पिता की मौत का तो दर्द है ही, लेकिन इतने लोगों की जान जाना हमारे लिए बहुत पीड़ादायक है। हमने कभी नहीं सोचा था कि भगवान इतनी बड़ी सजा भी देंगे। पिता का दुख है, लेकिन जिन लोगों के परिवार उजड़ गए हैं उनका दुख और बड़ा है। भगवान से प्रार्थना है कि सभी को इस दुख से उबारे। जिनके परिवार उजड़ गए हैं, उनको देखकर रहा नहीं जा रहा है।
जिंदगी भर झेलना पड़ेगा कलंक
उखलारसी गांव की संगम कॉलोनी के लोग आपस में कह रहे थे कि यह दर्द अब जिंदगी भर झेलना पड़ेगा। जो रिश्तेदार या मिलने वाले जयराम के अंत्येष्टि में आए और यहां उनको जो दर्द मिला है, उसे कोई नहीं भूल पाएगा। गाजियाबाद के इतिहास में यह इस तरह की पहली घटना होगी।