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मोदी जी! घर छोड़िए यहां तो स्कूलों में भी नहीं है शौचालय

Fri, 15 Apr 2016 12:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
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शौचालय - फोटो : अमर उजाला
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले देश भर में स्वच्छता और घर-घर शौचालय होने पर जोर दे रहे हों। इसके लिए बड़ी-बड़ी योजनाएं बनाई जा रही हों। करोड़ों-अरबों का बजट निर्धारित कर दिया गया हो, मगर जमीनी हकीकत यह है कि देश की राजधानी से सटे गाजियाबाद के कई प्राथमिक विद्यालयों और प्रमुख बाजारों में शौचालय ही नहीं है।
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 फिल्म स्टार विद्या बालन की घर-घर शौचालय और खुले में शौच न करने की अपील से जहां आम जनता जागरूक होने लगी है, वहीं सरकारी अधिकारियों पर इसका कोई असर पड़ता नजर नहीं आ रहा।

गाजियाबाद में जहां आठ हजार घरों में अभी शौचालय नहीं है, वहीं परिषदीय विद्यालयों की स्थिति अच्छी नहीं है। शहर के 58 स्कूलों में जहां शौचालय हैं ही नहीं, वहीं अनगिनत स्कूल ऐसे हैं जहां सफाई न होने की वजह से शौचालयों पर ताला लग चुका है। ऐसे स्कूलों में भी बच्चों को शौच के लिए बाहर ही भेजा जाता है।
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ऐसे में बच्चियों को दुपट्टे की ओट में शौच जाना पड़ता है। कई बार तो बच्चियों की दिन में इस वजह से छुट्टी तक दे दी जाती है। सामाजिक संस्था ‘नसर’ के अध्यक्ष नदीम ने बताया कि स्कूल में पानी और शौचालय के न होने की सूचना वह कई बार बीएसए और नगर शिक्षा अधिकारी को दे चुके हैं, बावजूद इसके अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इन स्कूलों में नहीं है शौचालय
उच्च प्राथमिक विद्यालय कैला, प्राथमिक विद्यालय दौलतपुरा, प्राथमिक विद्यालय सिकरौड़, प्राथमिक विद्यालय शहीदनगर नंबर दो, प्राथमिक विद्यालय सदरपुर, प्राथमिक विद्यालय मधुबन बापू धाम, प्राथमिक विद्यालय राजनगर, प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय नंदग्राम, प्राथमिक विद्यालय पटेलमार्ग आदि।

सामाजिक संस्थाओं ने पूर्व में बनवाए कई शौचालय
गत वर्षों में स्कूलों में शौचालय न होने पर लायंस और रोटरी क्लब ने कई विद्यालयों में शौचालय बनवाए। वर्तमान में भी शिक्षक अपने व्यक्तिगत प्रयासों से सामाजिक संस्थाओं द्वारा शौचालय बनवाने को प्रयासरत हैं।

क्या बोले बीएसए
जो शौचालय जर्जर हो चुकेहैं, नए वित्तीय वर्ष में वहां शौचालय बनवाने केलिए प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। बजट आते ही सभी विद्यालयों में शौचालय का निर्माण कराया जाएगा। - डा. प्रवेश यादव, बेसिक शिक्षा अधिकारी
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