अपनी पुत्रवधू की हत्या के आरोप में जेल में बंद बसपा के राज्यसभा सांसद नरेंद्र कश्यप की जमानत हाईकोर्ट ने मंजूर कर ली है। कश्यप सात अप्रैल 2016 से डासना जेल में बंद हैं। सेशन कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दी थी।
उनकी जमानत पर न्यायमूर्ति बच्चू लाल ने सुनवाई की। दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद न्यायाधीश ने जमानत अर्जी को मंजूर कर लिया। जमानत प्रार्थनापत्र पर अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने दलील दी कि नरेंद्र कश्यप की बहू हिमांशी की मौत हत्या नहीं बल्कि आत्महत्या थी।
उसका शव घर के बाथरूम में पाया गया। बाथरूम का दरवाजा भीतर से बंद था। उसने अपने पति की लाइसेंसी रिवाल्वर से खुदकुशी की। यह भी कहा गया कि याची मृतका का ससुर है और दिल्ली में रहते हैं। उनके और लड़की वालों के परिवार के बीच संबंध अच्छे रहे हैं।
घटना से ठीक एक दिन पहले कश्यप समाज की बैठक हुई थी, जिसमें हिमांशी के पिता ने भी शिरकत की थी। घटना के बाद वही खुद मृतका को लेकर अस्पताल गए और इसकी जानकारी सबसे पहले उन्होंने ही हिमांशी के पिता को दी थी।
मोबाइल फोन के रिकार्ड से भी जाहिर है कि सभी रिश्तेदारों को याची ने घटना की जानकारी दी। कश्यप और उनके परिवार के लोगों को फंसाने के इरादे से दहेज हत्या की झूठी कहानी गढ़ी गई।
नरेंद्र के अलावा उनकी पत्नी देवेंद्री पुत्र सागर कश्यप (पति), पुत्री सरिता कश्यप और पुत्र सिद्धार्थ कश्यप भी इस मामले में आरोपी हैं तथा जेल में बंद हैं। इन सभी के खिलाफ गाजियाबाद के कविनगर थाने में दहेज हत्या और दहेज उत्पीड़न की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज है। जमानत अर्जी पर अधिवक्ता रियाज अश्कर ने भी पक्ष रखा।