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बुजुर्गों ने छोड़ी मॉर्निंग वॉक, इनहेलर की मांग बढ़ी

Fri, 04 Nov 2016 11:08 PM IST
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
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स्माग - फोटो : अमर उजाला
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दिवाली के बाद से वातावरण में घुला प्रदूषित धुआं (स्मॉग) बुजुर्गों के लिए परेशानी बन गया है। तापमान में आई गिरावट और हवा नहीं चलने के कारण स्मॉग छंट नहीं रहा है। ऐसे में बुजुर्गों ने मॉर्निंग और इवनिंग वॉक तक बंद कर दी है। उधर स्मॉग के चलते दमा और श्वांस के रोगियों की परेशानी ने इनहेलर की डिमांड बढ़ा दी है।
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कुछ जागरूक परिजन अपने बच्चों को स्कूल भी मास्क लगाकर भेज रहे हैं।दिवाली के बाद से पीएम 10 की मात्रा नौ गुना बढ़ गई है। पिछले वर्ष के मुकाबले यह पांच गुना ज्यादा है। इस वर्ष प्रदूषण के कण 152 मीटर की ऊंचाई पर जाकर मिक्स हुए हैं। जबकि पिछले वर्ष 324 मीटर की ऊंचाई पर प्रदूषण पार्टिकल मिक्स हुए थे।

जमीन के नजदीक प्रदूषण कण मिलने से इस बार स्मॉग काफी ज्यादा है। तापमान में कमी के चलते कण ऊपर नहीं जा पा रहे हैं। इसके चलते ही दिवाली के बाद लगातार पांचवें दिन भी आसमान में स्मॉग छाया रहा। वातावरण में बढ़ते स्मॉग की वजह से बुजुर्गों ने मॉर्निंग वॉक पर जाना बंद कर दिया है।
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डॉक्टरों के अनुसार स्मॉग में बुुजुर्गों को सांस की तकलीफ, फेफड़ों में इंफेक्शन, जल्दी सांस फूलना आदि की समस्या हो रही है। बुजुर्गों को बाहर नहीं निकलने और मास्क पहनने की सलाह दी जा रही है। थोक दवा कारोबारी हेमंत मलिक के अनुसार इनहेलर की डिमांड बाजार में अचानक बढ़ी है। हालांकि इसकी कोई कमी नहीं है।

बाजार में इसका पर्याप्त स्टॉक है। आसमान में छाए इस जहरीले स्मॉग से सुबह सवेरे ही स्कूल जाने वाले बच्चों को भी परेशानी हो रही है। हालांकि इसे लेकर स्कूलों ने कोई गाइड लाइन जारी नहीं की है, मगर कुछ जागरूक माता-पिता अपने बच्चों को मास्क पहनाकर स्कूल भेज रहे हैं।

 पंजाब में धान कटाई के बाद घुन को जलाने से दिल्ली एनसीआर में बढ़ा प्रदूषण
प्रदूषण विभाग के अधिकारियों की मानें तो पंजाब में धान कटाई के बाद बचे वेस्ट (पराली) को जलाने से दिल्ली एनसीआर के प्रदूषण पर असर पड़ा है। यह भी कारण है कि प्रदूषण स्तर में कमी नहीं आ पा रही है। जिससे दिन भर स्मॉग आसमान में छाया रहता है।

रीजनल ऑफिसर पारसनाथ का कहना है कि मौसम की वजह से प्रदूषण में करीब दो से तीन गुना की बढ़ोतरी हो गई है। पिछले साल की हवा की गति 3.2 मीटर प्रति सेकेंड थी जबकि इस साल यह घटकर 1.3 मीटर प्रति सेकेंड हो गई है, जिससे स्मॉग छंटने में देरी हो रही है।

- पीएम-10 दे रहा अस्थमा और पीएम 2.5 खून में घुलकर पहुंचा रहा हानि
हवा में पाया जाने वाला पीएम-10 सांस के माध्यम से गले, श्वास नली और फेफड़ाें तक पहुंचता है और जम जाता है। इससे अस्थमा और सांस रोगों की शुरूआत हो जाती है। इसकी मात्रा 200 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से ऊपर जाने पर स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो जाता है।

पीएम-2.5 बहुत सूक्ष्म होता है और यह सांस के माध्यम से खून में चले जाते हैं। यह फेफड़ों को तो नुकसान पहुंचाता ही है। खून में घुलकर अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचाता है।

बोले बुजुर्ग
हमारे ग्रुप में जितने भी बुजुर्ग हैं , अब मॉर्निंग वॉक पर नहीं जा रहे हैं। स्मॉग में मॉर्निंग वॉक करने से सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। -माहितोष सेन गुप्ता, वैशाली
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स्मॉग इतना ज्यादा है कि मॉर्निंग वॉक करना मुश्किल है। चलने में सांस फूल रही है। इसको देखते हुए मॉर्निंग वॉक बंद कर दी है। -एके कौल, वैशाली
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