गाजियाबाद। शहर की बड़ी आबादी वाले इलाके राजनगर और कविनगर के बड़े नाले खस्ताहाल हैं। जगह-जगह इसकी साइड की दीवारें धंसी हैं और मलबा नाले के अंदर इकट्ठा हो गया है। मौसम विभाग ने इस माह के अंत में मानसून आने का अनुमान जताया है। इसके बावजूद निगम के बरसात से निपटने को लेकर पर्याप्त इंतजाम नहीं दिख रहे हैं। यह हालत तब है जब निगम का निर्माण का बजट 211 करोड़ से भी अधिक है।
नेहरूनगर से लेकर अन्य कई जगहों पर हाल ही में काम शुरू कराया गया है, जबकि अब से पहले ही नालों का निर्माण कार्य पूरा हो जाना चाहिए था। ताकि, जलभराव की समस्या से राहत मिल पाती। इतना ही नहीं, राजनगर, कविनगर से गुजरने वाले बड़े नालों को दुरुस्त कराने तक की जरूरत नहीं समझी गई। यह अनदेखी तब हो रही है जब बरसात के पानी की निकासी के लिए ये मुख्य नाले हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में जलभराव होने से इन्कार नहीं किया जा सकता।
इस बारे में नगर स्वास्थ्य अधिकारी मिथलेश कुमार ने बताया कि नालों की सफाई का काम अब अंतिम चरण में है। क्षतिग्रस्त नाला सही कराने के लिए निर्माण विभाग को पत्राचार किया गया है।
-पिछले साल भी जलभराव से परेशान हुए शहरवासी : राजनगर निवासी प्रदीप ने बताया कि पिछले साल हल्की सी बारिश में भी शहर जलमग्न हो गया था। राजनगर जैसे पॉश इलाके में भी एक फीट तक पानी भर गया था। अन्य इलाकों में भी स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं रही।