गाजियाबाद। एमएमएच कॉलेज में चल रहे प्राचार्य की कुर्सी के विवाद की सुनवाई हाईकोर्ट में अब नौ जनवरी को होगी। कॉलेज की प्रबंध समिति पक्ष का कहना है कि छह जनवरी को डॉ. पीयूष चौहान के पक्ष ने काउंटर दाखिल नहीं किया। उनके अधिवक्ता ने ही इसमें समय मांगा। जबकि, डॉ. पीयूष चौहान ने कहा कि प्रबंध समिति के अधिवक्ता ने इसमें समय मांगा। उनका दावा है कि उनके अधिवक्ता ने इसमें काउंटर भी दाखिल कर दिया है।
यह है मामला :
एमएमएच कॉलेज में प्राचार्य पद पर काम न करने देने का आरोप लगाते हुए डॉ. पीयूष चौहान ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उनका कहना है कि वीसी के आदेश के बावजूद भी उनको काम नहीं करने दिया जा रहा है। प्रबंध समिति ने उनको नियम विरूद्ध निलंबित कर दिया। वहीं, प्रबंध समिति ने तीन सौ से ज्यादा पन्नों का एक आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया है। जिसमें कहा गया है कि डाॅ. पीयूष चौहान आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहे हैं।
उन्होंने कॉलेज के सहायक लेखाकार अनुज उपाध्याय पर हमला कराया। हाईकोर्ट में प्रबंध समिति ने पुलिस द्वारा सत्र न्यायालय में दाखिल किए गए आरोपपत्र की प्रति भी पेश की है। डॉ. पीयूष पर प्राचार्य पर पद पर रहते हुए घोटाला करने का भी आरोप प्रबंध समिति ने लगाया है।
महासंघ ने की सुरक्षा देने की मांग :
कॉलेज के सहायक लेखाकार अनुज उपाध्याय को सुरक्षा देने की मांग को लेकर चौधरी चरण सिंह विवि संबद्ध कॉलेज गैर शैक्षिक कर्मचारी महासंघ की ओर से राज्यपाल को पत्र लिखा गया है। उनका कहना है कि अनुज उपाध्याय की जान को खतरा बना हुआ है। प्राचार्य पद पर रहते हुए जिन लोगों से डॉ. पीयूष चौहान ने हमला कराया, वह भी उनसे खुन्नस रखते हैं। कॉलेज आते जाते उनका पीछा भी किया जा रहा है। अनुज उपाध्याय ने बताया कि इस संबंध में पुलिस कमिश्नर को भी पत्र लिखा गया है। असुरक्षा के बीच काम करना मुश्किल हो रहा है।