गाजियाबाद। एमएमजी अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ के साथ मारपीट के मामले में पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट चिकित्सकों और कर्मचारियों ने बुधवार सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक कार्य बहिष्कार कर सीएमएस कार्यालय के बाहर धरना दिया। डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, फार्मासिस्ट, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और कर्मचारी यूनियन के सदस्य धरने पर बैठे रहे।
इसका असर यह हुआ कि करीब 2500 मरीज इलाज से वंचित रह गए। महज 150 मरीजों को ही उपचार मिल सका। आरोपी महिला को गिरफ्तार कर मेडिकल कराने के बाद धरना समाप्त हुआ। एसीपी उपासना पांडेय ने बताया कि आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से उसे जमानत मिल गई।
धरना-प्रदर्शन के दौरान ओपीडी, पंजीकरण, दवा वितरण, पैथोलॉजी जांच और अल्ट्रासाउंड जैसी अधिकांश सेवाएं ठप रहीं। अस्पताल में प्रतिदिन 60 से अधिक अल्ट्रासाउंड, 150 से अधिक एक्सरे और लगभग 60 सीटी स्कैन किए जाते हैं। कुछ एक्स-रे ही हो सके और अधिकांश मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा। पूर्व निर्धारित 15 ऑपरेशन भी नहीं हो सके।
मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट के तहत कार्रवाई की थी मांग
आरोप है कि आठ जुलाई को अस्पताल में भर्ती मरीज अरविंद मिश्रा की पत्नी सत्यभामा ने नर्सिंग ऑफिसर हिना विक्टर के साथ मारपीट की थी और नर्स दीपा व अलका से अभद्रता की थी। घटना के सात दिन बाद भी पुलिस ने सामान्य धाराओं में ही कार्रवाई की थी। कर्मचारी संगठन मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग कर रहे थे। नर्सिंग एसोसिएशन की अध्यक्ष हिना विक्टर ने बताया कि आरोपी महिला को कोर्ट में पेश करने की मांग पूरी होने के बाद धरना समाप्त कर दिया गया। अब न्यायालय का जो भी निर्णय होगा, वह स्वीकार होगा।
एक महीने में सात बार हुआ स्टाफ से दुर्व्यवहार
इमरजेंसी में तैनात चिकित्सकों के अनुसार, पिछले एक महीने में डॉक्टरों और कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार की सात घटनाएं हो चुकी हैं। मंगलवार रात भी दो युवकों ने शराब के नशे में इमरजेंसी में तैनात डॉक्टरों से गाली-गलौज की और धमकी दी कि दो मिनट में थाने से छूट जाएंगे। अस्पताल प्रशासन ने राहुल त्यागी और संस्कार शर्मा के खिलाफ पुलिस से शिकायत की है। चिकित्सकों का कहना है कि रात में इमरजेंसी गेट तोड़ने के प्रयास जैसी घटनाएं भी लगातार होती रहती हैं। इससे पहले 12 जून को इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. मुकेश पर एक युवती ने चाकू से हमला किया था।
इधर-उधर भटकते रहे मरीज
कार्य बहिष्कार के कारण मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ मरीज हड़ताल की जानकारी मिलते ही वापस लौट गए, जबकि कुछ ने हड़ताल खत्म होने की उम्मीद में घंटों इंतजार किया। कुछ मरीज धरने पर बैठे चिकित्सकों के पास भी पहुंचे, लेकिन उन्हें इमरजेंसी में भेज दिया गया। छपरौली से आई राजबाला हाथी की टूटी हड्डी की रिपोर्ट दिखाने और ऑपरेशन की तारीख लेने पहुंची थीं, लेकिन चिकित्सक नहीं मिले। इसी तरह बागपत से बेटे रिजवान का इलाज कराने आई मां भी मायूस होकर लौट गईं। शालीमार गार्डन की एक महिला दो साल के बच्चे को घर छोड़कर इलाज कराने आई थीं। उन्होंने धरनास्थल पर पहुंचकर कहा, मारपीट किसी और ने की है, लेकिन सजा हमें क्यों मिल रही है। इसी बीच एपेंडिक्स के दर्द के कारण भर्ती सुदामापुरी निवासी विनोद कुमार की समय पर इलाज न मिलने से हालत बिगड़ गई। उनकी पत्नी ने दूसरे अस्पताल भेजने की मांग की, जिसके बाद उन्हें दिल्ली स्थित जीटीबी अस्पताल रेफर कर दिया गया।
महिला का आरोप- सिर्फ नर्स का हाथ पकड़ा, उन्होंने स्टाफ रूम में ले जाकर पीटा
आरोपी महिला ने पुलिस को जो बयान दिया है, उसके अनुसार वह अपने पति को यूरीन पैन लगाने जा रही थी, उस दौरान स्टाफ नर्स बीच में खड़ी थी। उसका आरोप है कि उन्होंने मना कर दिया कि अभी यूरीन नहीं कराना है। कुछ देर बाद भी जब वह नहीं हटीं तो दोबारा गुस्से में हटने के लिए कहा। इस पर अन्य स्टाफ नर्स उसे धमकाने लगीं। उसका आरोप है कि सिर्फ स्टाफ नर्स का हाथ पकड़ा था और वीडियो बना रही थी। महिला का यह भी आरोप है कि नर्सिंग स्टाफ ने उसको स्टाफ रूम में ले जाकर पीटा।
जिला अस्पताल में धरने पर बैठे चिकित्सक व नर्स। संवाद
जिला अस्पताल में धरने पर बैठे चिकित्सक व नर्स। संवाद