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एमएमजी अस्पताल: सीपीआर प्रशिक्षण और हृदय रोग विशेषज्ञ की कमी

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गाजियाबाद। एमएमजी अस्पताल में हृदय गति रुकने पर कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) की जानकारी देने की कोई व्यवस्था नहीं है। अस्पताल के कई कर्मचारियों को इसका नियमित प्रशिक्षण भी नहीं मिलता है। इससे आपात स्थिति में मरीजों को शुरुआती मदद मिलने में देरी का खतरा बना रहता है। सरकारी अस्पतालों में सीपीआर प्रशिक्षण की कमी एक गंभीर समस्या है। एमएमजी अस्पताल में दो वर्ष से हृदय रोग विशेषज्ञ की भी नियुक्ति नहीं हुई है। यह स्थिति आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं पर सवाल उठाती है। हृदय रोग विशेषज्ञ विवुध प्रताप सिंह का कहना है कि समय पर सीपीआर मिलने से मरीज की जान बच सकती है। हृदय गति अचानक रुकने पर मरीज कुछ ही समय में बेहोश हो सकता है। उसकी सांसें सामान्य रूप से चलना बंद हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में तत्काल आपातकालीन चिकित्सा सेवा बुलाना जरूरी है। इसके साथ ही सीपीआर देना भी आवश्यक होता है।
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सीपीआर का महत्व और चुनौतियां

विवुध प्रताप सिंह के अनुसार, प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा मरीज की छाती पर सही तरीके से दबाव देने से रक्त संचार बना रहता है। इससे मरीज को अस्पताल पहुंचने तक जीवन रक्षक सहायता मिल सकती है। सीपीआर देने का सही तरीका जानना बहुत महत्वपूर्ण है। ताकि आपात स्थिति में प्रभावी सहायता दी जा सके। सही जानकारी के अभाव में सड़क, घर या सार्वजनिक स्थान पर लोग तत्काल मदद करने से हिचक सकते हैं।



अस्पताल प्रशासन के प्रयास

एमएमजी अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक राकेश कुमार ने बताया कि अस्पताल के स्टाफ को समय-समय पर प्रशिक्षित किया जाता है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति के लिए शासन और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र लिखा गया है। राकेश कुमार के अनुसार, हृदय रोग विशेषज्ञ की उपलब्धता आवश्यक है। साथ ही सीपीआर प्रशिक्षण की प्रभावी व्यवस्था से आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
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