गाजियाबाद। टीबी और एचआईवी पीड़ित मरीजों के इलाज की नई विधि अब गाजियाबाद में शुरू हो गई है। एमएमजी परिसर स्थित एआरटी (एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी) सेंटर पर ही अब एचआईवी के साथ टीबी से ग्रस्त मरीजों के लिए 99 डाट्स दवा दी जाने लगी है।
इसके लिए मरीज को क्षय रोग विभाग आने की जरूरत नहीं है। एक ऐसा सिस्टम तैयार किया गया है, जिसमें मरीज को एक मिस कॉल करने पर विभाग के पास पूरी जानकारी उपलब्ध होगी।
एआरटी सेंटर में 99 डाट्स दवा मिलने लगी है। दवा के साथ मरीज की मॉनीटरिंग करने के लिए एक ऐसा साफ्टवेयर लगाया गया है, जिसमें मरीज द्वारा रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से मिस्ड कॉल देने पर विभाग को पता चल जाएगा कि मरीज ने दवा खाई या नहीं खाई।
मिस्ड कॉल देने के बाद दवा की स्ट्रिप पर लिखा कोड डालना होगा। मरीज के दवा नहीं लेने पर डाक्टरों या स्टाफ उसके घर जाकर उसे दवा खाने के लिए प्रेरित करेगा। इस अभियान के तहत मरीजों की स्क्रीनिंग भी लगातार की जाएगी। क्योंकि अब सेंटर पर सीबीनॉट मशीन के आ जाने के बाद मरीजों की स्क्रीनिंग काफी आसान हो गई है।
कैसे करेगा काम
स्वास्थ्य विभाग मरीज के मोबाइल नंबर को 99 डॉट्स सॉफ्टवेयर पर रजिस्टर करेगा। मरीज को 28 दिन की दवा दी जाएगी। हर टैबलेट पर टोल फ्री नंबर लिखे होंगे। मरीज को हर दिन दवा लेने के बाद टोल फ्री नंबर पर मिस्ड कॉल देनी होगी।
इसके लिए मरीज दो से तीन नंबर रजिस्टर करा सकता है। मिस्ड कॉल 99 डॉट्स वेब पोटर्ल पर दिखाई देगा। अगर रोगी दवा लेने के बाद मिस्ड कॉल नहीं देता तो फील्ड वर्कर मरीज केघर पहुंच कर उसको दवा खाने के लिए प्रेरित करेगा।
छह माह की खुराक के बाद मरीज का दोबारा चेकअप किया जाएगा। इसके लिए छह लेयर मॉनीटरिंग की जाएगी। जिला क्षय रोग अधिकारी डा. डीके सक्सेना ने बताया कि यह सुविधा गाजियाबाद में शुरू कर दी गई है। इससे इलाज बीच में छूटने की समस्या नहीं आएगी। मरीजों के मोबाइल भी रजिस्टर किए जा रहे हैं।