गाजियाबाद। भाजपा उम्मीदवार अतुल गर्ग की जीत के साथ विधायक और मंत्री भी परीक्षा में पास हो गए। यह परीक्षा भाजपा को जिताने की थी। गाजियाबाद लोकसभा क्षेत्र में आने वाली पांचों विधान सभा सीटों पर भाजपा के ही विधायक हैं। वीके सिंह का टिकट कटने की सबसे बड़ी वजह उनसे विधायकों की नाराजगी ही बताई जा रही थी। इसलिए, सभी ने एकजुट होकर अतुल गर्ग का साथ दिया।
इनमें सबसे बड़ी परीक्षा साहिबाबाद के विधायक सुनील शर्मा की थी। उन्हें चुनाव से ऐन पहले काबीना मंत्री बनाया गया था। चुनौती भाजपा को ब्राह्मण वोट दिलाने की थी। कांग्रेस ने ब्राह्रमण उम्मीदवार उतारा था। डाॅली को इसका फायदा मिला। लेकिन, सुनील शर्मा को मंत्री पद मिल जाने की वजह से भाजपा का बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
दूसरे मंत्री नरेंद्र कश्यप हैं। 2022 में पांचों सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों की जीत के बावजूद उन्हें मंत्री बनाया गया था। वह विधान परिषद के सदस्य हैं। उनकी जिम्मेदारी पिछड़ों को जोड़ने की थी। जीत के बाद माना जा रहा है कि वह भी इस परीक्षा में पास हो गए।
गाजियाबाद सदर
चला अतुल गर्ग का जादू
2019 में वीके सिंह को 53,138 मिले थे। अतुल गर्ग को 1,37,206 वोट मिले हैं। ये 2019 के मुकाबले काफी ज्यादा हैं। अतुल गर्ग इसी सीट से विधायक हैं। उन्हें 2022 के विधानसभा चुनाव में 1,50,205 और 2017 में 1,24,224 वोट मिले थे। 2012 में उन्हें बसपा के सुरेश बंसल ने हराया था। सुरेश बंसल को 64,344 और अतुल गर्ग को 52,253 वोट मिले थे।
साहिबाबाद
फिर मिली सबसे बड़ी बढ़त
2019 में वीके सिंह को 3,39,122 वोट मिले थे। इस बार अतुल गर्ग को 3,11,036 वोट मिले हैं। ये 2019 की तुलना में कम हैं। वीके सिंह को 3,39,226 वोट मिले थे। हालांकि, इस बार भी यहां भाजपा को बंपर बढ़त मिली है। सुनील शर्मा लगातार दो बार जीत चुके हैं। उन्हें 2022 के विधानसभा चुनाव में 3,22,888 और 2017 में 2,62,741 वोट मिले थे। इससे पहले 2012 में भी चुनाव लड़े थे, लेकिन तब बसपा के टिकट पर लड़े अमरपाल शर्मा से हार गए थे। अमरपाल शर्मा को 1,24,332 और सुनील शर्मा को 99,984 वोट मिले थे।
पूरी हुई भाजपा की मुराद
मुरादनगर
2019 में वीके सिंह को 1,75,208 वोट मिले थे। इस बार अतुल गर्ग को 1,57,283 वोट मिले हैं। यहां भी भाजपा को ही सबसे ज्यादा वोट मिले हैं। भाजपा को 2022 में 1,69,290 और 2017 में 1,40,759 वोट मिले थे। दोनों बार अजीत पाल त्यागी चुनाव लड़े। 2012 में भाजपा के टिकट पर उनके पिता राजपाल त्यागी उम्मीदवार थे। उन्हें बसपा के वहाब चौधरी ने हराया था। वहाब को 57,103 और राजपाल त्यागी को 53,481 वोट मिले थे।
हर बार भाजपा का पलड़ा भारी
लोनी
वीके सिंह को 1,56,913 वोट मिले थे। अतुल गर्ग को 1,43,522 वोट मिले हैं। यहां भी भाजपा वोट हासिल करने में नंबर वन पर रही है। यहां दो बार से नंदकिशोर गुर्जर विधायक हैं। उन्हें 2022 में 1,27,410 और 2017 में 1,13,088 वोट मिले थे। 2012 में यहां भाजपा मुख्य मुकाबले में ही नहीं थी। पहले स्थान पर बसपा के जाकिर अली और दूसरे पर रालोद के मदन भैया रहे थे।
साठा-चौरासी में भी खिला कमल
धौलाना
क्षत्रियों के गढ़ साठा-चौरासी वाली इस सीट पर वीके सिंह पिछड़ गए थे। उन्हें 1,18,199 वोट मिले थे, जबकि सपा के सुरेश बंसल को 1,28,746 वोट मिले थे। अतुल गर्ग को 1,03, 989 वोट मिले हैं। वह सबसे आगे रहे हैं। यहां से धर्मेश तोमर विधायक हैं। 2022 में धर्मेश तोमर जीते थे। उन्हें 1,24,394 वोट मिले थे। 2017 भाजपा उम्मीदवार पूर्व सांसद रमेश चंद तोमर थे। उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। सीट बसपा के असलम चौधरी ने जीती थी। 2012 में भाजपा का टिकट वाईपी सिंह का मिला था। वह तीसरे स्थान पर रहे थे। तब धर्मेश तोमर सपा के टिकट पर लड़े थे और जीते थे।