हिंडन नदी को पुनर्जीवित करने की मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की कोशिश बैठकों की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। जमीनी हकीकत यह है कि स्थानीय स्तर पर अधिकारी हिंडन नदी को पुनर्जीवित करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। मामला सिर्फ बैठकों और कागजों तक ही सीमित है।
ऐसे में हिंडन जल बिरादरी के लोग आक्रोशित हैं और मामला सीएम तक ले जाने वाले हैं।
बता दें कि सहारनपुर में हिंडन की सहायक नदी पांव धोई को डीएम रहते हुए पुनर्जीवित करने वाले विशेष सचिव आलोक कुमार के साथ मेरठ और सहारनपुर मंडल के कमिश्नर को हिंडन नदी को पुनर्जीवित करने की जिम्मेदारी दी गई लेकिन मामला सिर्फ बैठकों तक सीमित है।
आगामी 27 जून को हिंडन नदी की चिंता कर रहे शहर के लोग मुख्यमंत्री से मुलाकात में अधिकारियों की कागजी फिक्र की पोल खोलने जा रहे हैं। हिंडन जल बिरादरी नदी के प्रति अधिकारियों की संवेदनहीनता पर दुखी और आक्रोशित है। जल बिरादरी के संयोजक विक्रांत शर्मा ने बताया कि गाजियाबाद में हिंडन नदी में मिट्टी और कूड़ा डालने के साथ ही विद्युत सब स्टेशन बना दिया गया।
नदी को पुनर्जीवित करने की दिशा में ऑस्ट्रेलिया से आई वाटर रिसोर्स ग्रुप की कोआर्डिनेटर एनेलीक माग्रीट लनिनगा से मिलने के लिए प्रशासन के पास वक्त नहीं है। 27 जून को हिंडन जल बिरादरी के पदाधिकारियों की लखनऊ में मुख्यमंत्री से मुलाकात होनी है।
यहां हिंडन को पुनर्जीवित करने की जमीनी हकीकत रखी जाएगी। साथ ही शुक्रवार को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर भी वस्तुस्थिति से परिचित कराया गया है।
..
सिर्फ बहता पानी ही नहीं है हिंडन नदी
हैरानी की बात ये है कि सिर्फ बहते पानी को ही नदी समझा जा रहा है। जल बिरादरी का कहना है कि आज तक किसी अधिकारी ने नहीं पूछा कि आखिर नदी है क्या? नदी तल, डूब क्षेत्र और घुमाव पर नदी की अधिक चौड़ाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
..
बैठक होने के बाद मिला आमंत्रण पत्र
हिंडन नदी पर बीती 16 मई को मेरठ में कमिश्नर के साथ बैठक थी। इसमें जल बिरादरी को भी बुलाया गया, लेकिन संस्था से सदस्यों को आमंत्रण पत्र बैठक संपन्न होने के एक सप्ताह बाद मिला।