गाजियाबाद। कांवड़ यात्रा की व्यवस्था संभालने के लिए किया गया डायवर्जन सोमवार को शहरवासियों के लिए मुसीबत बन गया। पांच अगस्त से लागू होने वाली वन-वे व्यवस्था को आधी-अधूरी तैयारी के बीच दो दिन पहले ही लागू कर दिया गया। न इसके लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए और न ही वाहनों को नियंत्रित करने के लिए ट्रैफिक कोन लगाए गए। नतीजा यह हुआ कि मेरठ रोड करीब 13 घंटे तक जाम की गिरफ्त में रही और हजारों लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी।
सुबह दफ्तर, स्कूल और जरूरी काम के लिए निकले लोग घंटों सड़क पर फंसे रहे। कई लोग समय पर कार्यालय नहीं पहुंच सके तो कई को रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा। मेरठ तिराहे से कादराबाद तक हालात सबसे ज्यादा खराब रहे। यहां करीब तीन घंटे तक यातायात पूरी तरह ठप रहा। सुबह करीब साढ़े आठ बजे पटरी से उतरी यातायात व्यवस्था रात नौ बजे तक भी सुचारु नहीं हो सकी।
अंदेशे पर रोक दिया रास्ता, व्यवस्था पर नहीं था नियंत्रण
मेरठ रोड पर पुलिस ने सभी कट पहले ही बंद कर दिए थे। कांवड़ियों की संख्या बढ़ने के बाद मेरठ रोड की गाजियाबाद आने वाली लेन बंद करने की योजना थी, लेकिन सोमवार सुबह ही पुलिस ने अचानक इस लेन पर यातायात रोक दिया। इसके बाद दूसरी लेन पर मेरठ जाने और गाजियाबाद आने वाले दोनों तरफ के वाहन दौड़ने लगे। एक ही लेन पर यातायात के दबाव ने पूरे मार्ग को जाम कर दिया। राजनगर एक्सटेंशन कट, गुलधर, तहसील मुख्यालय, राज चौपला, मोदी मंदिर समेत कई स्थानों पर वाहन रेंगते नजर आए। स्थिति यह रही कि लोगों को कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने में घंटों लग गए।
दूधेश्वरनाथ मंदिर के पास भी लगा जाम
सावन के पहले सोमवार को दूधेश्वरनाथ मंदिर में उमड़ी भीड़ के कारण जीटी रोड पर भी दबाव बढ़ गया। संकरे फ्लाईओवर और भारी वाहनों की आवाजाही से मेरठ तिराहे से चौधरी मोड़ तक जाम की स्थिति बनी रही।
कोन बाद में लगे, तब तक शहर भुगत चुका था खामियाजा
व्यवस्था की सबसे बड़ी कमी यह रही कि वन-वे लागू करने से पहले सड़क पर ट्रैफिक कोन और दिशा संकेतक नहीं लगाए गए। यातायात पुलिसकर्मी भी कई स्थानों पर समय से नहीं पहुंचे। शाम तक करीब 500 ट्रैफिक कोन लगाए गए, लेकिन तब तक हजारों लोग जाम की परेशानी झेल चुके थे। औद्योगिक क्षेत्रों में पुलिस पिकेट नहीं होने से भारी वाहन भी बेरोकटोक मेरठ रोड पर आते रहे। रोडवेज और सिटी बसों का संचालन भी जारी रहा, जिससे दबाव और बढ़ गया।
बच्चे, मरीज और श्रद्धालु भी फंसे
जाम का सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों पर पड़ा। दोपहर में छुट्टी के बाद कई स्कूल वाहन घंटों जाम में फंसे रहे। कई अभिभावक खुद बसों तक पहुंचे और बच्चों को लेकर घर गए। कुछ बच्चे दो से तीन घंटे देरी से घर पहुंचे। कई स्थानों पर एंबुलेंस भी जाम में फंसीं। लोगों ने मजबूरी में डिवाइडर पार कर रास्ता बनाने की कोशिश की, जिससे हादसे का खतरा बना रहा।
किसी का ऑफिस छूटा, किसी की परीक्षा और क्लास
राजनगर एक्सटेंशन, नंदग्राम और आसपास की सोसायटियों में रहने वाले लोगों के लिए सोमवार की सुबह परेशानी लेकर आई। निलाया ग्रीन्स निवासी पूजा शर्मा दिल्ली के शाहदरा जाने के लिए निकली थीं, लेकिन ढाई घंटे जाम में फंसने के बाद उन्हें लौटना पड़ा और घर से ही काम करना पड़ा। सौरभ अरोड़ा को पटपड़गंज स्थित कार्यालय पहुंचने में तीन घंटे लग गए। देरी के कारण उनकी महत्वपूर्ण बैठक छूट गई। राजनगर एक्सटेंशन निवासी अनिल कोकलियाल रोजाना नमो भारत से ओखला जाते हैं, लेकिन सोमवार को सोसायटी से स्टेशन पहुंचने में ही दो घंटे लग गए और वह दोपहर डेढ़ बजे कार्यालय पहुंच सके। गंगा विहार निवासी राहुल शर्मा सुबह सात बजे नोएडा के लिए निकले थे। मुरादनगर से शुरू हुए जाम में वह घंटों फंसे रहे। करीब 15 किलोमीटर की दूरी में उनका 10 लीटर से अधिक ईंधन खर्च हो गया और अंत में उन्हें वापस लौटना पड़ा। इंजीनियरिंग छात्र लवकुश की विशेष कार्यशाला छूट गई। उन्होंने बताया कि सुबह आठ बजे निकलने के बावजूद दोपहर तक कॉलेज नहीं पहुंच सके।
ये रहे जाम के कारण
-पुलिस पिकेट नदारद रही और यातायात पुलिसकर्मी ड्यूटी पर देर से पहुंचे।
-मेरठ-गाजियाबाद रोड को वन-वे करने से पहले आने-जाने वाले ट्रैफिक के लिए लेन नहीं बनाई।
-औद्योगिक क्षेत्र में पुलिस पिकेट तैनात नहीं की गई, जिससे बिना रोक-टोक भारी वाहन आते रहे।
-मेरठ-हरिद्वार रोडवेज और सिटी बसों को नहीं रोका गया।
-राजनगर एक्सटेंशन समेत दो दर्जन से अधिक सोसायटियों के कट बंद कर दिए गए।
-नंदग्राम, घूकना, दुहाई, मोरटा, मुरादनगर और मोदीनगर में अतिक्रमण को नहीं हटाया गया।
मेरठ रोड पर डायवर्जन के चलते सोमवार को कुछ दिक्कतें रहीं। शाम तक करीब 500 ट्रैफिक कोन लगा दिए गए हैं। स्कूल खुले होने के कारण भी कुछ समस्या आई। कमियों को दूर कर व्यवस्था बेहतर की जाएगी।
-त्रिगुन बिसेन, डीसीपी ट्रैफिक
मरीज और यात्री पैदल चलने को मजबूर
मेरठ रोड पर लगे भीषण जाम का सबसे ज्यादा असर सार्वजनिक परिवहन से सफर करने वाले लोगों पर पड़ा। कई स्थानों पर ऑटो और ई-रिक्शा चालक भी जाम में फंस गए, जिससे कई यात्रियों को कोई वाहन ही नहीं मिला। मजबूरी में लोगों ने सामान उठाया और पैदल ही गंतव्य की ओर निकल पड़े। मुरादनगर निवासी अनीता अपने बेटे को लेकर एमएमजी अस्पताल जाने के लिए निकली थीं। बेटे का टीकाकरण होना था। वाहन नहीं मिलने पर उन्हें करीब दो किलोमीटर तक बेटे को लेकर पैदल चलना पड़ा।ऐसी ही स्थिति सैकड़ों यात्रियों की रही। कोई कार्यालय पहुंचने के लिए पैदल चलता दिखा तो कोई बच्चों और बुजुर्गों को लेकर जाम से बाहर निकलने की कोशिश करता नजर आया।