‘एक तो चोरी, ऊपर से सीना जोरी’। शास्त्री नगर के पास एमपी नगर में नगर निगम ठेकेदार ने ऐसा ही किया। पहले तो पुलिया बनाए बिना ही नगर निगम से 92 हजार रुपये का भुगतान करा लिया। इसके बाद मेयर की रोक के बावजूद रातों रात पुलिया बनाकर इस घोटाले पर पर्दा डालने का प्रयास किया।
महापौर ने शुक्रवार को फिर पुलिया का निरीक्षण किया और निगम इंजीनियरों पर मिलीभगत का आरोप लगाया। हालांकि मेयर अभी भी यही कह रहे हैं कि धांधली करने वाले ठेकेदार को बख्शा नहीं जाएगा।एमपी नगर में पुलिया निर्माण हुए बिना ही भुगतान का मामला बुधवार को सामने आया था।
महापौर अशु वर्मा ने लोगों की शिकायत पर कालोनी का निरीक्षण किया तो वहां नई पुलिया बनी हुई नहीं मिली, बल्कि शिकायत के बाद ठेकेदार ने वहां काम शुरू कराया। महापौर ने इस मामले में जांच के आदेश दिए थे और जांच पूरी होने तक ठेकेदार को काम न करने के निर्देश दिए थे।
नीता कंस्ट्रक्शंस नाम की फर्म के कांट्रेक्टरों ने मेयर के आदेश को ठेंगा दिखाया और रातों रात पुलिया बनाकर धांधली पर पर्दा डाल दिया। हालांकि कांट्रेक्टर फर्म ने अभी सिर्फ ड्रेन कवर ही डाले हैं, जबकि काम आरसीसी की पुलिया बनाने का पास हुआ था।
महापौर को पुलिया निर्माण की शिकायत मिली तो उन्होंने शुक्रवार को फिर निरीक्षण किया, मौके पर ड्रेन कवर से पुलिया बनी हुई पायी गई।
एजेंसी वर्क की सभी फाइलें तलब की
पुलिया बनाने जैसे छोटे काम नगर निगम टेंडर की बजाय कोटेशन पर एजेंसी से करा लेता है। ऐसा इसलिए किया जाता है कि कई बार इमरजेंसी में पुलिया निर्माण कराना जरूरी हो जाता है, इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार नहीं किया जाता।
महज 80 हजार से एक लाख तक की रकम में पुलिया निर्माण हो जाता है, लेकिन सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा भी इन्हीं में होता है। फाइल तैयार कर भुगतान हो जाता है, लेकिन पुलिया नहीं बनाई जाती। अब एमपी नगर में धांधली का मामला सामने आने पर महापौर ने पुलिया निर्माण की सभी फाइलें तलब की हैं।
रोक के बावजूद ठेकेदार ने पुलिया निर्माण कर मामला दबाने का प्रयास किया है, लेकिन भ्रष्टाचार का यह मामला दबने नहीं दूंगा। ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई होगी। निगम के किसी अधिकारी की इसमें मिलीभगत पाई गई तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। - अशु वर्मा, महापौर।