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अटक सकते हैं वार्डों के काम

Fri, 23 Sep 2016 12:26 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
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मेयर अशु वर्मा - फोटो : अमर उजाला
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दिवाली से पहले वार्डों में विकास कार्यों की बयार का इंतजार कर रहे पार्षदों को बड़ा झटका लग सकता है। एक दिन धरना देने के बाद विकास कार्यों का आश्वासन तो मिला लेकिन निगम अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को भी टेंडर जारी नहीं किए।
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हाईकोर्ट में रिट दाखिल होने की चर्चा के चलते अधिकारियों ने टेंडर रोक दिए। अब निगम पार्षद सोमवार से फिर नगर आयुक्त और महापौर के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर रहे हैं।
निगम अधिकारियों ने सभी वार्डों में 50-50 लाख के विकास कार्य कराने का आश्वासन देकर करीब तीन महीने पहले ही पार्षदों से प्रस्ताव ले लिए थे।

इन प्रस्तावों पर एस्टिमेट भी तैयार हो गए। 90 पार्षदों के कोटे से 45 करोड़ के टेंडर जारी होने थे, लेकिन निगम सूत्रों की मानें तो अब महापौर कोटे और सिफारिशी नेताओं के प्रस्ताव आने से अब यह एस्टिमेट 80 करोड़ पहुंच गया है।
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इतने बड़ी रकम के काम कराना निगम के बूते से बाहर है। यही वजह है कि ओवर बजट हो जाने से निगम अधिकारी अब टेंडर जारी करने से कन्नी काट रहे हैं। कांग्रेस पार्षद दल के नेता राजीव भाटी का कहना है कि निगम अधिकारी जानबूझकर काम रोक रहे हैं।

अगर रिट दाखिल भी हुई है तो कोर्ट की अभी कोई डायरेक्शन नहीं मिली है। शनिवार तक टेंडर जारी न हुए तो सोमवार से अनिश्चितकालीन धरना देंगे। बसपा पार्षद दल नेता बाबू सिंह आर्य का कहना है कि टेंडर जारी करने में जानबूझकर अड़ंगा लगाया जा रहा है।

कोई रिट दाखिल नहीं हुई है। वार्डों में काम कराने के लिए टेंडर जारी न किए गए तो आंदोलन करेंगे। सपा पार्षद सत्यपाल यादव का कहना है कि बार-बार टेंडर जारी करने का आश्वासन देकर काम फिर रोक दिए जाते हैं। इसके पीछे का कारण समझ नहीं पा रहे हैं। टेंडर जारी न हुए तो विकास कार्यों के लिए धरना देंगे।

टेंडर के खिलाफ हाईकोर्ट में रिट दायर होने की जानकारी मिली है। इसकी डिटेल मंगाई जा रही है। फिलहाल टेंडर जारी नहीं किए गए हैं। - अब्दुल समद, नगर आयुक्त

अधिकारियों से वार्ता करेंगे, शुक्रवार को टेंडर जारी कराकर विकास कार्यों की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वार्डों में 50-50 लाख के काम जरूर कराए जाएंगे। - अशु वर्मा, महापौर

निगम की जमीनों पर हो रहे कब्जे मेयर ने मंडलायुक्त से मांगी मदद

नगर निगम की जमीनों पर लगातार हो रहे कब्जों को रोकने के लिए महापौर अशु वर्मा ने अब मंडलायुक्त से मदद मांगी है। बृहस्पतिवार को उन्होंने मेरठ मंडलायुक्त को पत्र भेजकर जमीन पर कब्जों की जांच और कार्रवाई कराने की मांग की। महापौर का यह पत्र स्पष्ट करता है कि निगम अधिकारी जमीनों पर कब्जा रोकने में नाकाम साबित हो रहे हैं।

बृहस्पतिवार को महापौर के पास विजय नगर निवासी एक व्यक्ति ने मवई गांव में सरकारी जमीन कब्जाने की शिकायत की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि मवई गांव की एनएच-24 से सटी एक हजार गज जमीन पर फर्जी कागजातों के सहारे कब्जा किया जा रहा है।

खसरा संख्या-346 की इस जमीन की कीमत 7-8 करोड़ रुपये बताई जा रही है। महापौर ने शिकायती पत्र के साथ मंडलायुक्त को पत्र भेजा है। उन्होंने कहा है कि नगर निगम में संपत्ति विभाग के पास अधिकारी उपलब्ध न होने के कारण बीते दिनों निगम की जमीनों पर लगातार कब्जे हो रहे हैं। सरकार की मंशा भी सरकारी जमीनों पर कब्जे रोकने की है। ऐसे में इस प्रकरण की जांच कराकर कार्रवाई कराई जाए।
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