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Ghaziabad News: देशभर में नामी डॉक्टरों की पहचान के साथ ठगी करने वाले गिरफ्तार

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स्वॉट टीम ने गिरफ्तार किए फर्जी डॉक्टर बनकर मेडिकल फॉर्मेसी को कॉल कर धोखाधड़ी करने के आरोपी। स - फोटो : एम्स में राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण व तम्बाकू निषेध पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक।
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गाजियाबाद। देश के अलग-अलग राज्यों में नामी डॉक्टरों के नाम पर फार्मेसी कंपनियों से करोड़ों की धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के चार सदस्यों को स्वॉट टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी डॉक्टर बनकर कॉल कर दवाएं मंगाते थे और फर्जी चेक सौंपकर फरार हो जाते थे। इस गिरोह ने गाजियाबाद, भोपाल, जयपुर, सूरत, अहमदाबाद, गुरुग्राम, पानीपत, मुरादाबाद, अंबाला, चंडीगढ़ नोएडा व दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में धोखाधड़ी की 54 से अधिक वारदातों को अंजाम दिया है।
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एडीसीपी अपराध पीयूष कुमार सिंह ने बताया कि एमएमजी अस्पताल के डॉक्टर समेत अन्य के नाम पर दवाएं मांगने के बाद ठगी की शिकायतें मिली थीं। इसके बाद टीम को इस मामले में लगाया गया। जहां सूचना के आधार पर शुक्रवार को गाजियाबाद रेलवे स्टेशन के पास माल गोदाम रोड से चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनकी पहचान मुकेश तनेजा (47), दीप सिंह चुग (36), मुकेश अखरिया उर्फ सुंदर(35) निवासी साईदास कॉलोनी थाना सब्जी मंडी जनपद रोहतक हरियाणा और अमित खुराना(39) निवासी सिविल अस्पताल के पास थाना आर्यनगर रोहतक हरियाणा के रूप में हुई है। दो फरार साथियों में साहिल खुराना और मुकेश मिट्ठल हैं।
ट्रू कॉलर पर तैयारी होती है फर्जी पहचान

पुलिस के अनुसार इस गिरोह का सरगना पूर्व मेडिकल रिप्रजेंटेटिव(एमआर) मुकेश तनेजा है। पूछताछ में उसने बताया कि गिरोह के सदस्य कई राज्यों में सक्रिय हैं। वह इंटरनेट से प्रदेश के किसी भी जिले के नामचीन निजी और सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर के नाम और पद का पता कर ट्रू कॉलर पर डॉक्टर के नाम की प्रोफाइल तैयार करते हैं। इसके बाद इंडिया मार्ट से आसपास की मेडिकल फार्मेसी का नंबर खोजकर उसे कॉल करते थे। कॉल करने पर मेडिकल फार्मेसी संचालक को डॉक्टर का नाम और पद दिखाई देता है। आरोपी डॉक्टर की तरह बात कर संचालक को विश्वास में लेकर दवाएं मंगवाते हैं।
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अस्पताल के बाहर ली जाती हैं दवाएं
पुलिस के अनुसार आरोपी जिस डॉक्टर की प्रोफाइल का प्रयोग करते हैं, उसके अस्पताल के बाहर आपूर्ति के लिए बुलाते हैं। दवाइयों का भुगतान नकद या चेक से करने की बात कही जाती है। दवाएं लेकर आए फार्मेसी के कर्मचारी को अस्पताल के बाहर ही गिरोह के अन्य सदस्य रोक लेते थे। अस्पताल के बाहर ही दवाई लेकर उन्हें फर्जी चेक भुगतान के रूप में सौंपकर फरार हो जाते हैं।

एक से पांच लाख तक की ठगी
पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी ने एक फार्मेसी से तीन से पांच लाख रुपये तक की ठगी की है। जांच में सामने आया है कि 54 वारदात में कुछ में तो प्राथमिकी भी दर्ज नहीं हुई है। एडीसीपी ने बताया कि शुरुआती जांच के बाद करीब ढाई करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की बात सामने आई है। गिरोह से 31 सिमकार्ड, एक मोबाइल फोन और लाखों रुपये की अलग-अलग कंपनियों की दवाइयां बरामद की गईं हैं।
दवाएं खरीदता था साहिल खुराना
मेडिकल फार्मेसी से धोखाधड़ी कर दवाई आपूर्ति होने पर इन्हें साहिल खुराना सस्ती दरों पर खरीदता था। साहिल खुराना एक मेडिकल स्टोर संचालक है और दवाओं को फार्मेसी कंपनियों को बाजार दरों पर बेचकर मुनाफा कमाता है। एडीसीपी ने बताया कि यह गिरोह दवाइयों की आपूर्ति शाम तीन से पांच बजे की बीच मंगाता था। ताकि फर्जी चेक को बैंक में न लगाया जा सके और उन्हें घटनास्थल से दूर जाने के लिए 24 घंटों का समय मिल सके।

जिले की दो दवाई कारोबारी से भी की धोखाधड़ी
नवंबर 2025 को इस गिरोह ने अंसल प्लाजा चिरंजीव विहार में आरके हेल्थकेयर एंड सर्जिकल फार्मेसी को कॉल कर एमएमजी अस्पताल के चिकित्सक तुषार अग्रवाल के नाम से कॉल किया था। डेढ़ लाख रुपये की कीमत की दवाई मंगाकर फर्जी चेक सौंपकर गिरोह भाग गया था। इसके बाद एक जनवरी 2026 को लोहिया नगर स्थित निकोल इंटरप्राइजेज के संचालक को डॉ. भीमराव आंबेडकर मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल सेक्टर 30 नोएडा के डॉ. अमित कुमार गुप्ता एचओडी के नाम से कॉल कर 1.09 लाख रुपये की दवाइयां मंगाईं थीं।

स्वॉट टीम ने गिरफ्तार किए फर्जी डॉक्टर बनकर मेडिकल फॉर्मेसी को कॉल कर धोखाधड़ी करने के आरोपी। स- फोटो : एम्स में राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण व तम्बाकू निषेध पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक।

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