पटाखा और बारूद बनाने वाले मजदूरों के लिए अच्छी खबर। सब कुछ ठीकठाक रहा तो जल्द ही उन्हें इस खतरनाक काम से निजात मिल जाएगा और अब वे तकनीशियन बनेंगे। बीते दिनों फर्रुखनगर पटाखा फैक्ट्री में हुए हादसे के बाद जिला प्रशासन ने एनजीओ के माध्यम से क्षेत्र में सर्वे कराया था। सर्वे के बाद अब वहां के करीब 800 लोगों को कौशल मिशन के तहत प्रशिक्षित किया जाएगा।
प्रशिक्षण के बाद उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जाएगा। जानकारी तो यहां तक मिली है कि प्रशासन का प्रयास है कि फर्रुखनगर में बर्तन बनाने वाली फैक्ट्री स्थापित की जाए, जिसमें लोगों को रोजगार मिल सके।एसडीएम सदर प्रेम रंजन ने बताया कि फर्रुखनगर हादसे के बाद गिरीराज एजूकेशनल एंड सोशल वेलफेयर ट्रस्ट के माध्यम से गांव का सर्वे कराया गया था।
सर्वे में सामने आया कि पटाखा कारोबार में लगे करीब 800 लोग इस काम को छोड़ना चाहते हैं, इनमेें 250 महिलाएं हैं। सर्वे करने वाली संस्था के संचालक गौरव भारद्वाज के मुताबिक पटाखा फैक्ट्री में लगे मजदूरों ने बताया कि उन्हें इसके अलावा और कोई काम नहीं आता है, ना तो उनके पास कृषि लायक जमीन है और नहीं कोई पूंजी, जिससे वे अपना कोई कारोबार कर सकें।
ऐसे में पेट भरने के लिए बारूद बनाना उनकी मजबूरी हैं, क्योंकि घर चलाने के लिए उन पर कर्जा भी है। सर्वे के दौरान सामने आया कि महिलाएं भी मजबूरी में काम कर रही थीं। वे सिलाई, कढ़ाई और बुनाई आदि काम करना चाहती हैं, लेकिन हुनर न होने की वजह से पति के साथ ही पटाखा फैक्ट्री में काम कर रही हैं। अब इन महिलाओं को स्वयं समूह बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
जून के अंतिम सप्ताह से प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू कर दिया जाएगा। प्रयास किया जा रहा है कि फर्रुखनगर में बर्तन बनाने वाली फैक्ट्री स्थापित की जाए, जिसमें लोगों को रोजगार मिल सके।
- इन कामों में किया जाएगा प्रशिक्षित
मुर्गी पालन, बेल्डिंग, बेसिक कंप्यूटर, मोबाइल रिपेयरिंग, वॉशिंग मशीन रिपेयरिंग, सिलाई, बुनाई और बर्तन बनाना आदि।