गाजियाबाद। परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश मृदुल मिश्रा के प्रशासनिक आदेश के बाद भोजपुर, मोदीनगर और निवाड़ी थाना क्षेत्रों से जुड़े भरण-पोषण से संबंधित मामलों की सुनवाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। अब इन क्षेत्रों के भरण-पोषण और उनकी रिकवरी से जुड़े मामलों की सुनवाई गाजियाबाद स्थित परिवार न्यायालय में न होकर मोदीनगर के ग्रामीण न्यायालय में की जाएगी। साथ ही इन थाना क्षेत्रों से जुड़े नए मामलों को दाखिला अब परिवार न्यायालय में होगा। किसी भी पुराने मामले का स्थानांतरण स्वतः नहीं होगा। यह पूरी तरह संबंधित प्रधान न्यायाधीश के विवेक और निर्णय पर निर्भर करेगा कि किन मामलों को मोदीनगर ग्रामीण न्यायालय में स्थानांतरित किया जाए।
अदालत से मिली जानकारी के अनुसार इस समय भोजपुर, मोदीनगर और निवाड़ी क्षेत्र से जुड़े लगभग दो हजार भरण-पोषण और उनकी रिकवरी से संबंधित मामले परिवार न्यायालय में विचाराधीन हैं। प्रशासनिक आदेश के बाद यह स्पष्ट किया गया है कि ये सभी केस अनिवार्य रूप से स्थानांतरित नहीं होंगे, बल्कि प्रत्येक मामले की प्रकृति और परिस्थितियों को देखते हुए अलग-अलग निर्णय लिया जाएगा। नए मामले ग्रामीण न्यायालय में ही दाखिल होंगे।
यह व्यवस्था बीएनएसएस की धारा 144 और 144(3) के तहत आने वाले भरण-पोषण एवं वसूली से जुड़े मामलों पर लागू होती है। इससे पहले इन मामलों की सुनवाई गाजियाबाद स्थित परिवार न्यायालय में होती रही है। इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों के पक्षकारों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। भोजपुर की दूरी गाजियाबाद से लगभग 40 किलोमीटर, मोदीनगर की 35 किलोमीटर और निवाड़ी की करीब 32 किलोमीटर है। कई गांवों की दूरी इससे भी अधिक होने के कारण पक्षकारों को हर तारीख पर आने-जाने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
प्रशासनिक आदेश का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुलभ बनाना और ग्रामीण क्षेत्रों के पक्षकारों को नजदीकी न्यायालय में सुनवाई का विकल्प उपलब्ध कराना है। हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि यह कोई स्वतः लागू होने वाला स्थानांतरण नहीं है, बल्कि एक वैकल्पिक व्यवस्था है, जिसे न्यायाधीश अपनी सुविधा, केस की स्थिति और न्यायिक आवश्यकताओं के आधार पर लागू कर सकते हैं।
इस व्यवस्था को लेकर अधिवक्ताओं का मानना है कि इससे न्यायालयों पर कार्यभार संतुलित करने में मदद मिल सकती है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र के पक्षकारों के लिए यह एक संभावित राहत का माध्यम भी बन सकता है, यदि उनके मामले मोदीनगर न्यायालय में स्थानांतरित किए जाते हैं। इससे उन्हें यात्रा में लगने वाले समय और खर्च में कमी आ सकती है।
फिलहाल स्थिति यह है कि सभी लंबित मामले पूर्व की तरह परिवार न्यायालय गाजियाबाद में ही विचाराधीन रहेंगे, जब तक कि उन्हें विधिवत आदेश के तहत मोदीनगर ग्रामीण न्यायालय में स्थानांतरित न किया जाए।