गाजियाबाद। अमर सपूतों की याद में अमर उजाला के अभिनव अभियान मां तुझे प्रणाम कार्यक्रम की श्रृंखला में शनिवार शाम दिल्ली-मेरठ रोड स्थित आरडी इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में नामी कवियों की महफिल सजी। ओज, शृंगार, हास्य के कवियों ने ऐसा समा बांधा कि श्रोता अपनी सीट से देर रात तक चिपके रहे। ठसाठस भरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट और वाह-वाह से गूंजता रहा। देश के अमर सपूतों की वीरता का बखान करते हुए वीर रस के कवि अनुभव शुक्ला ने आजादी के मस्तानों की टोली को हम नमन करें, गोरों के सीने पर लगती गोली को हम नमन करें..सुनाया तो लोगों ने भारत माता के जयघोष करने शुरू कर दिए। वहीं, विख्यात कवि डाॅ. हरिओम पंवार ने ओज की कविता का पाठ जोशीले अंदाज में किया तो श्रोता भी जोश में आकर जयकारे लगाने लगे और कुर्सियों पर खड़े होकर तालियों से अभिवादन किया। माहौल को हल्का और खुशनुमा करने के लिए मशहूर हास्य कवि विनोद पाल ने अपनी कविताओं से हसगुल्लों की बौछार कर दी। हंसी के ठहाकों से पूरा हॉल गूंज गया।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। बतौर मुख्य अतिथि प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप, पुलिस आयुक्त अजय कुमार मिश्र, छाबड़ा 777 ज्वेलर्स की ओर से अजय छाबड़ा, आरडी इंजीनियरिंग कॉलेज की ओर से राकेश शर्मा और नूतन शर्मा, चार्म्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के अजय सिंघल ने की। मंच का संचालन अनुभव शुक्ला ने किया।
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ये पंक्तियां रहीं महफिल की शान
आजादी के मस्तानों की टोली को हम नमन करें
गोरों के सीने पर लगती गोली को हम नमन करें
हंसते हंसते फांसी पर झूले वो तीनों दीवाने
बासंती चोला गाती उस बोली को हम नमन करें
- अनुभव शुक्ला
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देश हित में सरहदों पर अड़े वीर हैं
मां की रक्षा की खातिर लड़े वीर हैं
आपके हित में जवानी को रख दांव पर
चोटियों पर हमारी खड़े वीर हैं
- शिखा दीप्ति, शृंगार
इक तरफ कुआं इक ओर खाई मिले
दर्द - बेचैनी - पीड़ा तन्हाई मिले
जा तुझे देता हूँ दिल से ये बद्दुआ
जया बच्चन सी तुझको लुगाई मिले
विनोद पाल, हास्य कवि
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बाबूजी से अच्छा कोई यार नही हो सकता है
भाई बहन से बेहतर रिश्तेदार नही हो सकता है
मां से बढ़कर इस दुनिया में केवल मां ही होती है
मां से बढ़कर और किसी का प्यार नही हो सकता है
मोहन मुंतजिर, बागी गीतकार
नई सदी परमाणु बम के गहने पहने बैठी है .
घायल धरती मां अंबर से पीड़ा कहने बैठी है .
मुझको ये पूरी दुनिया लाचार दिखाई देती है .
चीर हरण के चौसर का दरबार दिखाई देती है
मेरी कलम कामना गाती है जग की खुश हाली की .
लेकिन दिल में आग भरी है दुनिया की बदहाली की .
- डॉ हरिओम पंवार
भविष्य को विचारने में हित नहीं है
रेखाएं निहारने में हित नहीं है
कर्म क्षेत्र में ही जीवन रस छिपा है
भाग्य को पुकारने में हित नहीं है
धर्मवीर सिंह, ओज
राधिका गर नहीं कृष्ण कैसे बने
पार्वती के बिना शंभू कैसे सजे
प्रकृति का नियम है सरल दोस्तों
आदि से बिन मिले अंत कैसे बने
मोहिनी राय, शृंगार
इनका रहा सहयोग
छाबड़ा 777 ज्वेलर्स, आरडी इंजीनियरिंग कॉलेज, चार्म्स कैसल, समरकूल, मोटर क्राॅफ्ट, आईएमई ग्रुप, ड्रीम सिट्रान, पेस आईआईटी, एटलांटा हास्पिटल, जिंदल पब्लिक स्कूल, रॉयल कॉलेज, इन्मेन्टेक इंस्टीट्यूट, आरकेजीआइटी, माहेश्वरी फार्मा, विनोद कुक वेयर, सेंट टेरेसा स्कूल, करारा सेरेमिक, संगम होंडा, सेंट जेवियर वर्ल्ड स्कूल, बादल चूर्ण, उर्वशी साड़ी, एचआरआईटी यूनिवर्सिटी, श्रीराम पिस्टन एंड रिंग्स, गणेश हास्पिटल, ईस्ट दिल्ली पब्लिक स्कूल, एसएसके पब्लिक स्कूल, मानव हास्पिटल, सन वैली इंटरनेशनल स्कूल, जेएसपी प्रोजेक्ट, शगुन स्वीट्स, हाईटेक इंस्टीट्यूट, श्री पारसनाथ इलेक्टि्रकल्स, वेदांता इमेंजिंग एंड डायग्नोस्टिक, ओम सन पब्लिक स्कूल, ग्लोबल कॉलेज ऑफ लॉ, हेल्थ पार्टनर-एवि हास्पिटल, ट्रिनिटी इंटरनेशनल स्कूल मुरादनगर, एचएलएम ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन, आरपी गोल्ड मसाले, डि्रजिलिंग लैंड वाटर पार्क, केडीबी पब्लिक स्कूल, गणपति हाईटेक,राज प्राॅपर्टी।