शहर के राजनगर स्थित प्रीसिडियम स्कूल के आलीशान भवन परिसर में शनिवार रात पौने नौ बजे एक तेंदुआ घुस गया। गार्डों के खदेड़ने पर तेंदुआ स्कूल के पीछे ज्वार के खेतों से होता हुआ घने जंगल में छिप गया।
यह खबर इलाके में तेजी से फैली और सिकरोड गांव के लोग भारी संख्या में लाठी-डंडे लेकर पहुंच गए। वन विभाग की टीम भी पहुंच गई। तेंदुए के पंजों के निशान मिलने पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया, जो देर रात तक जारी था।
वन विभाग ने आसपास के इलाकों को अलर्ट कर दिया है। इलाके में दहशत का माहौल कायम हो गया है। रात एक बजे तक तेंदुआ नहीं मिला था। रविवार सुबह वन विभाग पिंजरा लेकर तेंदुए की तलाश करेगा।
स्कूल के गार्ड संदीप सिंह, अजय कुमार और यशविंदर ने बताया कि रात पौने नौ बजे उन्होंने गेट नंबर एक से स्कूल में घुसते हुए तेंदुए को देखा। उसकी लंबाई करीब तीन फीट थी। तेंदुए को अपनी तरफ बढ़ते देख उन्होंने अपने डंडे पटके तो वह स्कूल की करीब दस फीट ऊंची दीवार को कूदकर खेतों में घुस गया।
गार्डों ने शोर मचाया और वन विभाग और पुलिस को सूचना दी। आधे घंटे के अंदर डीएफओ बीपी सिंह पूरी टीम के साथ वहां पहुंच गए। वन विभाग के दरोगा अशोक गुप्ता ने बताया कि स्कूल के तीन तरफ ज्वार के घने जंगल हैं।
इन जंगलों में दो जगहों पर तेंदुए के पंजों के निशान मिले हैं। उन्होंने कहा कि निशान तेंदुए के ही लगते हैं, हालांकि इसकी छानबीन की जाएगी। उन्होंने बताया कि स्कूल के पास ही करीब एक एकड़ जमीन में 25 फीट गहरे गड्ढे हैं। तेंदुआ इस गड्ढे या जंगल में हो सकता है। रविवार सुबह पिंजरा लेकर तेंदुए की तलाश की जाएगी।
खा गए पांच बकरी और कई कुत्ते
सिकरोड गांव के लोगों ने बताया कि शुक्रवार शाम भी खेत में ट्रैक्टर चलाते हुए एक किसान ने तेंदुए को देखा था लेकिन तब उसकी बात पर किसी ने विश्वास नहीं किया था। वन विभाग के कर्मियों ने बताया कि दो दिनों के अंदर इलाके से कई कुत्ते गायब हो गए हैं।
शक है कि तेंदुए ने उसका शिकार किया होगा। वन दरोगा ने बताया कि दस दिनों पहले यहां से करीब चार किलोमीटर दूर दुहाई मंदिर में पांच बकरी मरी पाई गई थीं। तब इलाके में तेंदुआ होने के शक में तेंदुआ पकडुने वाला पिजरा हिंडन एयरबेस के जंगल से मंदिर में मंगाया गया था।
यह पिंजरा रविवार सुबह मंदिर से यहां लाया जाएगा। बता दें कि डेढ़ महीने पहले हिंडन एयरबेस के जंगल में तेंदुआ देखे जाने की खबर ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी।