अधिवक्ताओं के अदालत में पेश नहीं होने से नहीं हो सकी सुनवाई, 15 करोड़ से अधिक के ऋण घोटाले का मामला
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के 15 करोड़ रुपये से अधिक के कथित ऋण घोटाले में आरोप तय करने को लेकर सोमवार को सीबीआई की विशेष अदालत में सुनवाई होनी थी, लेकिन अधिवक्ताओं के अदालत में पेश नहीं होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। अदालत ने मामले में अगली तारीख 22 सितंबर तय कर दी है।
मामला यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय कार्यालय मेरठ की शिकायत पर सीबीआई की ओर से दर्ज मुकदमे से जुड़ा है। इसमें बैंक की तत्कालीन अधिकारी शेफाली शर्मा, करन दीप सिंह और निजी व्यक्ति निखिल गौर, नितिन गौर समेत 10 आरोपी हैं। सीबीआई ने तत्कालीन क्षेत्रीय प्रमुख पवन कुमार गौर की शिकायत पर 24 दिसंबर 2018 को मुकदमा दर्ज किया था।
सीबीआई का आरोप है कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत मेसर्स जेआर फूड्स के नाम पर करीब 15 करोड़ रुपये का कार्यशील पूंजी ऋण स्वीकृत कराया। जांच में ऋण के लिए लगाए गए व्यापारिक विवरण, लाभ-हानि खाते और अन्य वित्तीय दस्तावेजों में अनियमितताएं मिलने का दावा किया गया है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, जेआर फूड्स की ओर से 15 फरवरी 2017 को 15 करोड़ रुपये की क्रेडिट लिमिट के लिए आवेदन किया गया था। ऋण स्वीकृति के लिए लगाए गए दो बड़े खरीद आदेश भी जांच में फर्जी पाए गए। सीबीआई का आरोप है कि बैंक स्तर पर दस्तावेजों का आवश्यक सत्यापन नहीं किया गया। मामले में आरोप तय करने की प्रक्रिया के तहत सुनवाई होनी है। अब अगली तारीख पर अदालत में इस मामले में आगे की कार्यवाही होगी।