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अपनों ने ठुुकराया...प्रेरणा आश्रम ने गले लगाया

Mon, 28 Nov 2016 10:36 PM IST
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
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old couple - फोटो : demo pic
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‘जिंदगी जिनके लिए जीती रही, अपना पेट काट कर जिनका पेट भरती रही, बुढ़ापे की दहलीज पर उन्हीं बच्चों ने सड़क का रास्ता दिखा दिया। हाथ, पैर से लाचार जिस गली में सारी उम्र काटी, उसी के चौराहे पर पेट पालने के लिए अपना हाथ फैलाना पड़ा। हालात की मारी यह 75 वर्षीया प्राची देवी अब प्रेरणा बाल आश्रम में रह रही हैं।
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मूल रूप से आगरा की रहने वाली प्राची देवी वर्षों तक  शहर की एक कालोनी में किराए पर रहीं और अपने बच्चों का पालन पोषण किया। मोहल्ले वालों का कहना है कि प्राची देवी और उनके पति मोेहल्ले में ही अंडे की रेहड़ी लगाकर बच्चों का पेट पालते रहे। बच्चे बड़े हुए तो बेटियों की शादी कर दी और बेटा दिल्ली जाकर रहने लगा।

कई वर्ष पहले उनके पति की मृत्यु हो गई फिर भी प्राची देवी रेहड़ी लगाकर अपना पेट पालती रहीं। पिछले करीब एक वर्ष से वे अपने हाथ पैर से भी लाचार हो गईं तो मकान मालिक उन्हें उनकी बेटियों के पास छोड़ आए।कुछ दिनों बाद प्राची देवी को दोबारा मोहल्ले वालों ने शहर के चौराहे पर भीख मांगते देखा तो लोगों ने प्राची के बेटे को बुलाकर उसके साथ भेजा।
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मगर पिछले पंद्रह दिन से फिर प्राची देवी इसी चौराहे पर ही दिखीं। इसकी जानकारी लोगों ने प्रेरणा सेवा आश्रम में दी। सूचना पाकर आश्रम संचालक आचार्य तरुण मौके पर पहुंचे और बुजुर्ग महिला को अपने साथ ले आए। तीन दिन से यह महिला कविनगर स्थित प्रेरणा आश्रम में बच्चों के साथ रह रही है।

कुछ भी पूछने पर प्राची देवी रो पड़ती हैं और बस एक ही बात कहती हैं कि अब उनका इस दुनिया में कोई नहीं है। हाथ, पैर टूट गए नहीं तो वे काम करके अपना पेट पाल ही लेतीं। आचार्य तरुण का कहना है कि  आश्रम में रह रहे अनाथ बच्चों को दादी मिल गई और दादी अम्मा को भरा पूरा परिवार। प्राची देवी भी इस आश्रम में आकर खुश हैं।
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