बढ़ते प्रदूषण की वजह से महानगरों में हर तीसरा आदमी क्रोनिक ओब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) का शिकार है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सीओपीडी को 5वीं सबसे खतरनाक बीमारी बताया है।
चिकित्सकों का कहना है कि इसका इलाज अगर समय पर नहीं कराया गया तो लापरवाही बड़ा खतरा बन सकती है। प्रदूषण की वजह से आजकल फेफड़ों संबंधी बीमारियां 30 फीसदी बढ़ गई हैं। लोगों में रोग के प्रति जागरूकता लाने के लिए प्रतिवर्ष नवंबर के हर तीसरे बुधवार को विश्व सीओपीडी डे मनाया जाता है।
क्या है सीओपीडी
यह फेफड़ों की बीमारी है, जिससे सांस की नलियां सिकुड़ जाती हैं। इन नलियों में सूजन आ जाती है। यह सूजन लगातार बढ़ती जाती है इसके चलते फेफड़े छलनी हो जाते हैं। इससे सांसों में रुकावट आने लगती है और धीरे-धीरे सांस लेना मुश्किल हो जाता है।
डॉ. आशीष अग्रवाल ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में चूल्हे पर खाना बनाने के लिए 22 फीसदी लोग लकड़ी और आठ फीसदी लोग केरोसिन का प्रयोग करते हैं। लगभग 50 फीसदी मौतें बायोमास स्मोक के कारण होती हैं, जिसमें 75 फीसदी महिलाएं होती हैं।
एमएमजी के सीएमएस और वरिष्ठ चेस्ट फिजिशियन डॉ. जेके त्यागी ने बताया कि आज हम जिस हवा में सांस ले रहे हैं, वह काफी जहरीली है। हवा में मौजूद नैनो पार्टिकल्स फेफड़ों की कार्यप्रणाली को सबसे अधिक प्रभावित करता है। इससे बचाव के लिए धूम्रपान और वायू प्रदूषण वाले स्थान पर जाने से बचें या फिर मास्क लगाकर जाएं।
मॉस्क्यूटो कॉयल धूम्रपान से अधिक खतरनाक
मॉस्क्यूटो कॉयल (मच्छर अगरबत्ती) का हम आजकल धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि मॉस्क्यूटो कॉयल 100 सिगरेट से अधिक धुआं छोड़ता है। जो लोग धूम्रपान नहीं करते वह भी इस अनजान खतरे की जद में हैं।
जंतर-मंतर पर आज धरना देंगे डॉक्टर
मंगलवार को आईएमए भवन में आयोजित प्रेसवार्ता में आईएमए अध्यक्ष डॉ. राजीव गोयल ने बताया कि नए क्लीनिकल एक्ट के विरोध में बुधवार को आईएमए के डॉक्टर जंतर-मंतर पर दो घंटे का प्रतीकात्मक धरना देंगे।
इससे पहले जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपेंगे। डा प्रहलाद चावला ने बताया कि बीस नवंबर को आईएमए भवन में डायबिटीज जांच शिविर का आयोजन किया जाएगा। प्रेसवार्ता में आईएमए के पदाधिकारी डॉ वीवी जिंदल, डा एचएचडी भारद्वाज, डा प्रहलाद चावला आदि उपस्थित थे।