फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ghaziabad News: निर्माल्य से बन रही अगरबत्ती, जैविक खाद और बायोगैस

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
ज्योति यादव

साहिबाबाद। टीएचए क्षेत्र के कई मंदिर अब पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मिसाल पेश कर रहे हैं। यहां प्रतिदिन फूल-मालाएं, पत्तियां, दूध और पूजन सामग्री (निर्माल्य) से लोगों के घर महक रहे हैं। फूल-पत्तियों को री साइकिल करके अगरबत्ती, जैविक खाद और बायोगैस तैयार की जा रही है। इस पहल से न केवल जैविक कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण हो रहा है, बल्कि जल, भूमि और वायु प्रदूषण को भी कम करने में मदद मिल रही है। मंदिर समितियों की ओर से पर्यावरण संरक्षण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में प्रभावी कदम साबित हो रहा है।

छह वर्षों से हो रहा पुनर्चक्रण
इंदिरापुरम स्थित शिप्रा सन सिटी मंदिर में विशेष मशीन की सहायता से पूजा में चढ़ाए गए फूल, पत्तियां, दूध और अन्य जैविक सामग्री का प्रसंस्करण किया जाता है। मंदिर समिति के चेयरमैन व पार्षद संजय सिंह ने बताया कि छह वर्ष पहले मंदिर परिसर में मशीन लगाकर निर्माल्य को जैविक खाद और बायोगैस तैयार की जा रही है। इस गैस से रसोई में प्रसाद बनाने समेत अन्य प्रयोग किया जाता है। जैविक खाद का इस्तेमाल मंदिर परिसर और आसपास के निवासी भी अपने घरों के पौधों के लिए यह खाद ले जाते हैं। शिप्रा सन सिटी मंदिर को ग्रीन टैंपल की अवधारणा पर चलाया रहा है। प्लास्टिक और थर्माकोल से बने डिस्पोजेबल बर्तनों के उपयोग पर पूरी तरह रोक है और बिजली की आपूर्ति भी सोलर से हो रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


फूलों से तैयार हो रही प्राकृतिक अगरबत्ती
वैशाली स्थित गोपेश्वर मंदिर समिति ने एक निजी कंपनी के सहयोग से पूजा में चढ़ाए गए फूल-मालाओं के पुनर्चक्रण की पहल शुरू की है। मंदिर से एकत्रित फूलों की पहले छंटाई (सेग्रिगेशन) की जाती है। इसके बाद उन्हें सुखाकर और आवश्यक प्रक्रिया से गुजारकर प्राकृतिक अगरबत्ती तैयार की जाती है। इस पहल से एक ओर पूजा सामग्री का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो रहा है तो दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है।
-
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें