गाजियाबाद। 117 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के साथ अब नगर निगम अधिकारी अर्थला झील पर बने मकानों से कब्जा हटाकर सरकारी जमीन खाली कराएंगे। निगम ने पीपी एक्ट (पब्लिक प्रेमिसेज एक्ट) के तहत 129 लोगों को नोटिस जारी कर अर्थला झील की सरकारी जमीन पर बनाए गए मकानों को तत्काल गिराने के आदेश दिए हैं।
एक सप्ताह में अवैध निर्माण नहीं गिराने पर नगर निगम और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि गाजियाबाद में जमीन की कीमतें बढ़ीं तो भूमाफियाओं ने अर्थला झील की सरकारी जमीन पर प्लाटिंग कर दी। झील की जमीन को चोरी-छिपे भरवा कर सरकारी जमीन को महंगे दामों पर बेच दिया गया।
करीब तीन साल पहले नगर निगम ने हाईकोर्ट के आदेश पर यहां सर्वे कराया और झील पर मकान बनाने वालों और जमीन बेचने वालों की सूची तैयार की। अब एनजीटी ने तालाबों, झील और पोखरों को खाली कराने का आदेश जारी किया तो निगम ने युद्धस्तर पर कार्रवाई शुरू की है।
मंगलवार को नगर निगम की ओर से साहिबाबाद थाने में 117 लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद अब 129 लोगों को नोटिस जारी कर अवैध निर्माण ध्वस्त कराने के आदेश दिए गए हैं। नगरायुक्त चंद्रप्रकाश का कहना है कि नोटिस पर भी अवैध निर्माण नहीं गिराने पर एनजीटी के आदेशों के मुताबिक कार्रवाई कर जमीन खाली कराई जाएगी।
एनजीटी में हलफनामा दाखिल कर बताया एक्शन प्लान
गाजियाबाद। तालाबों, पोखरों और झीलों से अतिक्रमण हटाकर उनका जीर्णोद्धार कराने के मामले में बुधवार को एनजीटी में सुनवाई हुई। नगर निगम की ओर से नगरायुक्त ने पेश होकर एनजीटी में हलफनामा दाखिल किया।
उन्होंने तालाबों-झील से कब्जा हटाने के लिए अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट देने के साथ-साथ आगामी कार्ययोजना की जानकारी भी दी। नगरायुक्त ने बताया कि चार श्रेणी में तालाबों को चिह्नित कर लिया गया है। बिना कब्जे और आंशिक कब्जे वाले तालाबों की खुदाई शुरू कराई जाएगी।
इसके साथ ही जो तालाब सरकारी योजनाओं में चले गए हैं, उनके बदले दूसरे स्थानों पर तालाब खुदवाए जाएंगे। इस पर एनजीटी ने इस मामले में नगर निगम, प्रशासन और शासन को करीब डेढ़ महीने की मोहलत दे दी है।