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इधर जेब खाली, उधर महंगी हुई थाली

Sat, 19 Nov 2016 12:32 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
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अन्य - फोटो : अमर उजाला
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पुराने नोट बदलने और पैसों के लिए घंटों लाइन में खड़े होने वाली आम पब्लिक को अब महंगाई की मार भी झेलनी पड़ रही है। शादियों के सीजन में नोटबंदी के बाद अब रोटी पर भी संकट आ गया है। आटा और बेसन के अलावा कई जरूरी खाद्य पदार्थों के दामों में अचानक तेजी आई है।
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इससे लोगों को बजट गड़बड़ा गया है। हालांकि दुकानदारों का कहना है कि आवक रुकने से महंगाई के हालात बने हैं। मगर लोग कह रहे हैं कि यह कालाबाजारी है। दुकानदार जानबूझकर सामान कम दिखाकर रेट बढ़ा रहे हैं।  

नोटबंदी का असर खाद्य पदार्थों पर पड़ना शुरू हो गया है। शादियों के सीजन में भी किराना मंडी से ग्राहक गायब हैं। दूसरी ओर आटा, बेसन, रिफाइंड ऑयल, चने की दाल में अचानक से उछाल आ गया है। रामनगर किराना मंडी के व्यापारी शंकर कुमार ने बताया कि 500 व 1000 का नोट बंद के बाद से किराना कारोबार काफी प्रभावित हुआ है।
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आटा, रिफाइंड ऑयल, बेसन और चने की दाल में तेजी है। जो खुला आटा पहले 20 से 21 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, वह अब 24 से 25 रुपये किलो के रेट पर पहुंच गया है। वहीं ब्रांडेड कंपनियों के आटे के पैकेट की कीमतें इस रेट से भी ऊपर हैं।

चने की दाल 110 रुपये से बढ़कर 140 रुपये किलो तक पहुंच गई है। दूसरी ओर बेसन के भी दाम काफी बढ़े हैं। पैकेट बंद बेसन 140 रुपये किलो जबकि खुला बेसन 130 रुपये किलो में दिया जा रहा है।

वहीं कालोनियों में लोगों को बेसन 180 से 190 रुपये किलो खरीदना पड़ रहा है। रिफाइंड ऑयल 78 रुपये से बढ़कर 83 रुपये प्रति लीटर हो गया है। फुटकर बाजार में विक्रेता मनमाफिक दाम लगाकर लोगों को देते हैं।

 किराना व्यापारी देवेंद्र हितकारी का कहना है कि कैश से राशन लेने वाले ग्राहक कम आ रहे हैं। जिनके यहां शादी है, उन्हें उधार पर राशन दिया गया है। बाजार में कैश न होने से काफी दिक्कतें हो रही हैं। 
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