होली पर अस्पतालों में चाक-चौबंद व्यवस्था का दावा करने वाले स्वास्थ्य विभाग के पास अब एंटीबायोटिक का स्टाक ही नहीं है। पिछले कई महीनों से उधारी पर काम चलाने के बाद अब अस्पतालों में एंटीबायोटिक दवाएं पूरी तरह खत्म हो गई हैं। इतना ही हाई बीपी की दवा से लेकर आई ड्रॉप और एक्सरे प्लेट्स भी खत्म हैं।
अस्पताल प्रबंधन द्वारा लगातार शासन को रिमाइंडर भेजने के बावजूद भी पिछले चार महीने से शासन द्वारा बजट नहीं भेजा गया है।शासन द्वारा साल 2016 की तीसरी तिमाही के बाद बजट न मिलने से अन्य जीवन रक्षक दवाइयों की भी कमी चल रही थी। बजट न मिलने के चलते लगातार उधार पर दवाइयां मंगाई जा रही हैं।
दवा कंपनियों ने दोनों जिला अस्पतालों सहित अंडर सीएमओ चलने वाले सीएचसी व पीएचसी को अब तक करोड़ों का उधार दे दिया है। अब उधार पर भी दवाएं नहीं मिल रही हैं। फिलहाल एमएमजी में करीब छह एंटीबॉयोटिक खत्म हो गई हैं। फार्मासिस्ट की मानें तो हॉस्पिटल में एक आई ड्रॉप क्लोरोफेनेकॉल भी खत्म हो चुका है।
नॉरफ्लॉक्स और सिप्लॉक्स के अलावा सभी एंटीबॉयोटिक और एंटी इंफ्लेमेटरी दवाओं का स्टॉक जिला अस्पताल में खत्म हो गया है। संयुक्त अस्पताल में भी आई ड्रॉप, दर्द निवारक दवाएं खत्म हैं और जल्द ही एंटीबायोटिक की दवाएं स्टाक खत्म होने वाला है। इसके अलावा हाई बीपी की दवा नेफेडिपिन भी खत्म हो गई है।
एमएमजी के सीएमएस डॉ. जेके त्यागी और संयुक्त जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि शासन को लगातार दवाओं के बजट के लिए रिमाइंडर भेजा जा रहा है।
संयुक्त अस्पताल में पिछले एक महीने से बड़े एक्सरे नहीं हो रहे हैं। इसके अलावा एमएमजी में भी अब एक्सरे प्लेट्स खत्म हो रहे हैं।
हॉस्पिटल के पास एक्सरे की बड़ी प्लेट और अन्य सामान न होने से दोनों अस्पतालों से रोजाना 8-10 मरीजों को लौटना पड़ रहा है। हॉस्पिटल में सिर्फ छोटे और बच्चों के ही एक्सरे हो रहे हैं। चेस्ट, स्पाईन और एबडोमन के एक्सरे के लिए आने वाले लोगों को निराश लौटना पड़ता है।