निजी बिल्डरों की तर्ज पर अब आवास विकास परिषद को भी आवंटी डिफाल्टर मानने लगे हैं। इसका कारण है कि करीब एक माह से रिफंड मांग रहे लोगों को परिषद फ्लैट के रुपये नहीं लौटा रहा है। परिषद ने पिछले साल बिना बुकिंग किए मंडोला में 556 करोड़ रुपये के बहुमंजिला इमारतों के टेंडर छोड़ दिए थे। अब आवंटियों के साढ़े आठ करोड़ लौटाने भारी पड़ रहे हैं।
मंडोला विहार योजना में अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से हुई एक बड़ी गड़बड़ी सामने आ रही है। परिषद के नए नियमों के अनुसार बुकिंग आने के बाद ही योजना के फ्लैटों का निर्माण किया जाएगा। मगर अधिकारियों ने पिछले साल मंडोला में बहुमंजिला योजना के 556 करोड़ के टेंडर पहले ही छोड़ दिए। योजना के लिए बमुश्किल दर्जनभर आवेदन आए हैं।
इनमें से भी ज्यादातर रिफंड लेने की तैयारी में है। 556 करोड़ में से एक बड़ी राशि ठेकेदारों को भुगतान की गई। इसके बाद अब परिषद का अकाउंट खाली हो गया है। अकाउंट में रुपये नहीं हैं, जबकि आसरा-सपना योजना के करीब 200 आवंटियों को साढ़े आठ करोड़ का बकाया चुकाना है।
एक माह से चक्कर काट रहे आवंटियों का कहना है कि निजी बिल्डरों की तर्ज पर आवास विकास भी उनके साथ ठगी कर रहा है। जल्द ही वे इसका विरोध करेंगे। उधर, आवास आयुक्त आरपी सिंह का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था। जल्द ही समस्या समाधान कर आवंटियों का रिफंड दिया जाएगा।
- आसरा-सपना के आवंटी लगातार मांग रहे रिफंड
2012 में लांच की गई आसरा-सपना योजना को परिषद ने दो साल में पूरा करना था लेकिन चार साल बीतने के बाद अब इसकी रजिस्ट्री शुरू की गई है। अभी भी फ्लैटों की फिनिशिंग का काम जारी है। इसके चलते आवंटी लगातार रिफंड मांग रहे हैं। 500 से ज्यादा लोग रिफंड ले चुके हैं और 200 कतार में हैं।