नगर निगम की हाउस टैक्स में छूट की पॉलिसी पर विवाद खड़ा हो गया है। नगर निगम अधिकारी पूरे साल टैक्स पर 20 फीसदी की छूट देने के पक्ष में नहीं हैं। वह इसके लिए दिल्ली, लखनऊ नगर निगमों की तर्ज पर स्लैब बना चुके हैं।
चुनाव लड़ने के दौरान सालभर छूट दिलाने का वादा कर चुके महापौर भी अब अधिकारियों से सहमत हैं, लेकिन उन्हीं की पार्टी की पार्षद मोनिका मित्तल ने इस पर कड़ा विरोध जताया है।
उन्होंने इस नीतिगत फैसले को बिना कार्यकारिणी और सदन की सहमति लिए लागू करने पर निगम अफसरों और मेयर को भी घेरा है। ऐसे में अब महापौर और अफसरों ने छूट की इस पॉलिसी को लागू करने पर रोक लगा दी है।
भाजपा पार्षद मोनिका मित्तल का कहना है कि नीतिगत फैसले को अफसर अपनी मर्जी से लागू कर सदन का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि बीते साल मार्च महीने तक छूट दी गई तो इस बार इस नीति में बदलाव क्यों किया जा रहा है।
इस छूट पॉलिसी को विधानसभा चुनाव में होने वाले नफे-नुकसान से भी जोड़कर देखा जा रहा है। विरोध को देख महापौर ने इस पर रोक लगा दी है। अब कार्यकारिणी समिति की बैठक बुलाकर इससे संबंधित प्रस्ताव रखा जाएगा। कार्यकारिणी समिति के सभी 12 सदस्यों की राय लेकर इस पर निर्णय लिया जाएगा।
निगम की ओर से प्रस्तावित छूट स्लैब
अप्रैल से जुलाई तक 20 फीसदी
अगस्त से सितंबर तक 15 फीसदी
अक्तूबर से नवंबर तक 10 फीसदी
दिसंबर से जनवरी तक 05 फीसदी
फरवरी से मार्च तक शून्य
महापौर के निर्देश पर फिलहाल टैक्स छूट पॉलिसी को रोक दिया गया है। इस पर अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है। जल्द ही इसे फाइनल कर लिया जाएगा। - डीके सिन्हा, अपर नगर आयुक्त
कार्यकारिणी मीटिंग बुलाकर अन्य प्रस्तावों के साथ छूट के मुद्दे पर भी चर्चा कराई जाएगी। सभी सदस्यों की सहमति पर ही कोई निर्णय लिया जाएगा। - अशु वर्मा, महापौर