पश्चिमी यूपी के जायरीनों के लिए गाजियाबाद में हिंडन किनारे हज हाउस पर शिलान्यास से लेकर लोकार्पण तक विवाद ही विवाद देखने को मिले। इस मुद्दे को लेकर कभी भाजपा और सहयोगी दलों का विरोध, कभी मामले में हाईकोर्ट में रिट, कभी शिलान्यास कार्यक्रम पर ही मंत्री आजम खां से बदतमीजी तो कभी हज हाउस के निर्माण में लगी एजेंसियों के चलते यह विवाद सामने आए।
कोर्ट में शिवसेना ने डाली थी सबसे पहली रिट
हिंडन नदी किनारे हज हाउस बनाने का निर्णय 2005 में तत्कालीन मुलायम सिंह सरकार में लिया गया था। जमीन फाइनल होने के साथ ही मार्च-2005 में इसका शिलान्यास कार्यक्रम तय कर दिया गया था। 30 मार्च को शिलान्यास कार्यक्रम होना तय हुआ था।
इससे ठीक छह दिन पहले यानी 24 मार्च को ही शिवसेना के नेता महेश कुमार आहूजा ने गाजियाबाद सिविल कोर्ट में एक अर्जी देकर हज हाउस का विरोध जताया था। महेश आहूजा बताते हैं कि उनकी इस अर्जी पर आज तक भी सुनवाई नहीं हो सकी है।
उनके बाद बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद द्वारा भी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में रिट दाखिल की गईं थी। हालांकि इन रिटों को न्यायालयों ने खारिज कर दिया था।हज हाउस का शिलान्यास उस समय ‘मिनी मुख्यमंत्री’ माने जाने वाले आजम खां को करना था, हालांकि इस कार्यक्रम में सीएम मुलायम सिंह यादव केआने का कार्यक्रम भी तय हो गया था।
शिलान्यास वाले दिन सुबह अधिकारियों ने हज हाउस के आसपास जबरदस्त सुरक्षा व्यवस्था की थी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आजम खां समय से कुछ पहले ही यहां पहुंच गए, मगर गेट पर तैनात तत्कालीन साहिबाबाद इंस्पेक्टर गंवई प्रसाद यादव ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। दरअसल इंस्पेक्टर आजम खां को पहचान नहीं पाए थे।
आजम खां के विरोध करने पर इंस्पेक्टर ने उनके साथ बदतमीजी कर दी थी। इससे नाराज होकर आजम खां बिना शिलान्यास किए ही दिल्ली चले गए और वहीं से मुलायम सिंह को घटना की जानकारी दी। तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह यादव का हेलीकाप्टर भी हज हाउस के ऊपर ही चक्कर काटकर दिल्ली की ओर चला गया। इस कारण उस दिन शिलान्यास नहीं हो सका।
इंस्पेक्टर की बदतमीजी के चलते सपाइयों ने हज हाउस को सजाने के लिए रखे गमले भी इधर-उधर फेंक दिए थे। बाद में गाजियाबाद और नोएडा के एसपी सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट समेत कई अधिकारियों पर निलंबन की गाज गिरी थी, मगर इंस्पेक्टर गंवई प्रसाद यादव के खिलाफ कोई कार्रवाई न होना काफी चर्चा बना था।
निर्माण एजेंसियों में भी उलझा था मामला
हज हाउस का मामला कई निर्माण एजेंसियों के कारण भी उलझा था। दरअसल कई निर्माण एजेंसियों द्वारा इसका कार्य किया गया था। ऐसे में इसके खर्च का हिसाब नहीं मिल रहा था। इसी को लेकर आजम खां ने यूपी के मुख्य सचिव जावेद उस्मानी को पत्र भी लिखा था। उनकी नाराजगी वित्त विभाग से थी।
विभाग ने हज हाउस में खर्च हुए पैसों का हिसाब मांगते हुए और धन जारी करने से इंकार कर दिया था। हज हाउस के लिए अब तक हज हाउस में आवास विकास परिषद, उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड, जल निगम की कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज जैसी निर्माण एजेंसियों ने काम किया है।
कभी अस्पताल तो कभी कांवड़ियों के लिए भवन बनाने की भी उठी मांग
हज हाउस को लेकर विभिन्न दलों और संगठनों की मांग भी तेज रही। भाजपाइयों ने जहां हज हाउस को सामुदायिक भवन घोषित करने की मांग उठाई थी, तो कुछ संगठनों ने इस कांवड़ियों के लिए ठहराव स्थल बनाए जाने की मांग रखी थी। शुक्रवार को एक निजी कार्यक्रम के तहत गाजियाबाद पहुंचीं साध्वी प्राची ने भी हज हाउस पर बयान दिया कि इसे अस्पताल बना देना चाहिए।
अब सीएम के कार्यक्रम पर फिर संशय
करीब 40 करोड़ की लागत से अब हज हाउस बनकर तैयार हो चुका है। पश्चिमी यूपी के कई जिलों से जायरीन यहां से हज के लिए रवाना भी हो चुके हैं, मगर हज हाउस का आधिकारिक लोकार्पण कार्यक्रम अभी बाकी है।
इसके लिए सीएम ने पहले चार अगस्त का समय दिया, मगर फिर कार्यक्रम अचानक रद्द कर दिया गया। अब सीएम ने पांच सितंबर का कार्यक्रम दिया है, मगर इससे ठीक तीन दिन पहले ही एनजीटी के एक आदेश ने सीएम के इस दौरे को भी संशय में डाल दिया है।
हालांकि अधिकारियों का कहना है कि सीएम के मिनट्स आ चुके हैं। इसी के चलते शुक्रवार को भी डीएम निधि केसरवानी ने अन्य विभागों के अधिकारियों के साथ मिलकर हज हाउस पर सीएम कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा भी लिया।