गाजियाबाद। एनसीआर के पेट्रोल पंपों पर अपने खर्च पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) कैमरे लगाने के दबाव का सामना कर रहे पेट्रोल पंप स्वामियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने पांच अक्तूबर तक पंप स्वामियों के खिलाफ कैमरे लगवाने को लेकर किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई या दबाव नहीं बनाने का निर्देश दिया है। मामले में सोमवार को अगली सुनवाई होगी।
याचिकाकर्ता उत्तर प्रदेश पेट्रोलियम ट्रेडर्स एसोसिएशन की ओर से अदालत में दलील दी गई कि प्रशासन और तेल कंपनियां बिना कानूनी अधिकार के पंप स्वामियों पर कैमरे लगाने का दबाव बना रही हैं। इससे उन पर लाखों रुपये का वित्तीय बोझ पड़ेगा। एसोसिएशन ने कहा कि यदि सरकार या तेल कंपनियां अपने खर्च पर कैमरे लगाती हैं तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति इन्द्रजीत शुक्ला की पीठ ने की।
पेट्रोल पंप एसोसिएशन का पक्ष
जिला पेट्रोल डीजल विक्रेता एसोसिएशन के महासचिव अभिषेक जैन ने बताया कि प्रशासन और तेल कंपनियों की ओर से पंप स्वामियों पर एएनपीआर कैमरे लगाने का दबाव बनाया जा रहा था। उन्होंने इसे नियम विरुद्ध बताते हुए कहा कि सोमवार को होने वाली सुनवाई के बाद आगे की कानूनी दिशा तय होगी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार या कंपनियां अपने खर्च पर कैमरे लगाती हैं तो एसोसिएशन पूरा सहयोग करने को तैयार है।
लगातार तीसरे दिन सर्वर ठप, बिना जांच बिकता रहा तेल
गाजियाबाद। वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए चलाए जा रहे पीयूसीसी जांच अभियान के तहत पेट्रोल पंपों पर तैनात कर्मचारियों के मोबाइल फोन में आपूर्ति विभाग का विशेष एप डाउनलोड कराया गया है। जिले में कुल 125 पेट्रोल पंप हैं, जहां 1300 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। हालांकि, सर्वर ठप होने की वजह से शनिवार को लगातार तीसरे दिन भी एप काम नहीं कर सका। एप के काम नहीं करने के कारण जिले भर में वाहनों के पीयूसी सर्टिफिकेट की जांच नहीं हो सकी। पेट्रोल पंपों पर तैनात कर्मचारी दिनभर सर्वर शुरू होने का इंतजार करते रहे। कर्मचारियों के अनुसार सर्वर डाउन होने और विभाग की ओर से कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं किए जाने के कारण बिना जांच के ही वाहनों में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी भरनी पड़ी।