गाजियाबाद। हार्ट अटैक के मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने और शुरुआती एक घंटे के भीतर जान बचाने की संभावना बढ़ाने के लिए जिले में स्वास्थ्य विभाग ने स्टेमी कार्यक्रम के तहत स्पोक एंड हब मॉडल लागू कर दिया है। इस व्यवस्था के तहत हार्ट अटैक की आशंका वाले मरीजों की तत्काल जांच की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें जीवनरक्षक इंजेक्शन दिया जाएगा।
इसके बाद मरीजों को मेरठ स्थित लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाएगा। वहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्रत्यारोपण जैसी उन्नत सुविधाएं अपेक्षाकृत कम लागत पर उपलब्ध होंगी।
स्टेमी कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. अनुराग संजोग ने बताया कि जिले में एमएमजी अस्पताल, संयुक्त जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोनी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुरादनगर और 50 बेड संयुक्त अस्पताल लोनी को स्पोक सेंटर के रूप में विकसित किया गया है।
इन केंद्रों पर सीने में दर्द या हार्ट अटैक के लक्षण लेकर पहुंचने वाले मरीजों की तत्काल ईसीजी जांच की जाएगी। जांच में यदि एसटी एलिवेशन मायोकार्डियल इंफार्क्शन (स्टेमी) की पुष्टि होती है तो बिना देरी किए थ्रोम्बोलाइटिक इंजेक्शन देकर मरीज को हब सेंटर मेरठ मेडिकल कॉलेज भेजा जाएगा।
40 से 50 हजार रुपये का इंजेक्शन मिलेगा निशुल्क
डॉ. अनुराग ने बताया कि मरीजों को आवश्यकता के अनुसार टेनेक्टेप्लेस या स्ट्रेप्टोकाइनेज इंजेक्शन लगाया जाएगा। बाजार में इन इंजेक्शनों की कीमत लगभग 40 से 50 हजार रुपये तक होती है, लेकिन सरकारी व्यवस्था के तहत पात्र मरीजों को यह सुविधा निशुल्क और समय पर उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद मेरठ मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजिस्ट की देखरेख में एंजियोप्लास्टी और जरूरत पड़ने पर स्टेंट प्रत्यारोपण किया जाएगा।
जून में 309 मरीजों की हुई जांच
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जून में जिले के पांचों स्पोक सेंटरों पर 309 मरीजों की ईसीजी जांच की गई। इनमें एमएमजी अस्पताल की इमरजेंसी में एक मरीज में हार्ट अटैक की पुष्टि हुई थी। हालांकि, परिजन उसे निजी अस्पताल लेकर चले गए।
गोल्डन ऑवर सबसे महत्वपूर्ण
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सचिन वैश्य ने बताया कि हार्ट अटैक के मामलों में गोल्डन ऑवर सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान रक्त के थक्के को घोलने वाला इंजेक्शन समय पर लगा दिया जाए तो हृदय की मांसपेशियों को होने वाले स्थायी नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्पोक एंड हब मॉडल से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को समय पर विशेषज्ञ उपचार मिल सकेगा और गंभीर मरीजों की जान बचाने की संभावना पहले की तुलना में काफी बढ़ेगी।