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Ghaziabad News: नोएडा में मौत के 24 घंटे बाद घर पहुंचा हर्षित का शव

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इंदिरापुरम। थानाक्षेत्र के ज्ञानखंड तीन स्थित शिप्रा रिवेरा सोसायटी निवासी हर्षित भट्ट (23) का शव बृहस्पतिवार शाम करीब पौने चार बजे इंदिरापुरम स्थित घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। मां दीपमाला और छोटी बहन फूट-फूटकर रोने लगीं। शाम को हिंडन श्मशान घाट पर पिता ललित चंद्रा ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया। आठ अप्रैल को नोएडा सेक्टर-94 स्थित गड्ढे में गिरकर हर्ष की मौत हो गई थी। वह नोएडा सेक्टर-125 स्थित निजी विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन की पढ़ाई कर रहे थे।
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सोसायटी निवासी हेमंत वाजपेयी ने बताया कि हर्षित पढ़ाई के साथ-साथ स्कूलों में फिटनेस ट्रेनिंग भी देते थे। उनके पिता सीआरपीएफ जवान हैं और वर्तमान में उनकी तैनाती लद्दाख में है। हर्षित बुधवार सुबह घर से परीक्षा देने के लिए कहकर नोएडा गए थे। शाम करीब 6 बजे हर्षित के ही एक दोस्त ने उनकी मां दीपमाला को फोन करके हादसे की जानकारी दी थी। आनन-फानन वह अपने रिश्तेदारों के साथ नोएडा पहुंची तो बेटे की मौत का पता चला। शव मोर्चरी में पहुंचने के बाद देर रात करीब 2ः30 बजे वह वापस घर लौटीं। इस हादसे की सूचना जब हर्षित के पिता ललित चंद्रा को मिली तो वह फ्लाइट की टिकट बुक की लेकिन वह रद्द हो गई। इसके बाद उन्होंने दूसरी फ्लाइट लेनी पड़ी।
बृहस्पतिवार दोपहर करीब तीन बजे हर्ष के पिता दिल्ली और वहां से नोएडा पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। बेटे के शव को लेकर वह बृहस्पतिवार दोपहर बाद करीब 3ः45 बजे इंदिरापुरम स्थित घर पहुंचे। जैसे ही छात्र का शव घर के बाहर एंबुलेंस से उतरा तो मां और बहन उससे लिपट गईं। घर पर शव उतरते ही रिश्तेदारों और सोसायटी के लोगों उनके घर पर उमड़ पड़े। इसके बाद शव हिंडन घाट पर ले गए और वहां अंतिम संस्कार किया।
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बहन से बनवाई थी इडली-सांभर, मां को किया था मैसेज
हर्षित बुधवार को कॉलेज से परीक्षा देकर निकला तो उसने अपनी मां को मैसेज करके बताया कि वह देर से आएगा। वहीं, अपनी बहन से इडली-सांभर बनाने को कहा था। उनकी मां दीपमाला ने लोगों को बताया कि वह हर रोज बेटे को कॉल कर लेती थीं लेकिन उस दिन वह कॉल नहीं कर पाईं। क्या पता था कि उन्हें बेटे की आवाज नहीं दुनिया से जाने की खबर सुनाई देगी।
हादसे के बाद सोसायटी में पसरा सन्नाटा
सोसायटी में जब हर्षित की मौत के बारे में सूचना मिली तो पूरी सोसायटी में सन्नाटा पसर गया। हर कोई परिवार के साथ उनके दुख में खड़ा था। घटना की जानकारी से लेकर हर्षित के अंतिम संस्कार तक में निवासियों ने पीड़ित परिवार के दुख में पूरा सहयोग किया।
सुबह तक बहन को नहीं पता था कि भाई नहीं रहा
हादसे की जानकारी जब हर्षित की मां दीपमाला को मिली तब उन्होंने क्षेत्र में ही रहने वालीं अपनी बहन को घर बुलाया। इसके बाद बेटी को जरूरी काम से जाने की बात कहकर घर से निकली थीं। हर्षित की बहन देर रात घर लौटीं तो मां ने उनको कुछ नहीं बताया। बस बेटे की मौत के आंसू पीकर बेटी को संभालती रहीं और कोशिश करती रहीं कि उसे हादसे का पता न लगे। सुबह तक हर्षित के नाना-नानी व अन्य रिश्तेदार भी घर पहुंच गए। अचानक लोगों के एकत्र होने पर उनकी बेटी को कुछ आभास तो हुआ लेकिन मां को हिम्मत में देख वह शांत थी। कुछ देर बाद जब उसे पता चला कि 24 घंटे पहले जिस भाई ने उसे आवाज दी थी वह अब कभी सुनाई नहीं देगी। भाई की आहट अब बस एक याद बनकर रह जाएगी। यह जानते ही वह फूट-फूट कर रो पड़ीं, किसी तरह परिजनों ने उन्हें संभाला।

प्रशासन की लापरवाही ने बुझा दिया चिराग
सोसायटी के लोगों ने हादसे पर कड़ी नाराजगी जताते हुए घटना के पीछे प्रशासन की लापरवाही बताई है। जिस स्थान पर हादसा हुआ वहां इतना बड़ा गड्ढा होने के बावजूद सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं थी। आखिर वहां आने-जाने का रास्ता क्यों खुला हुआ था। सोसायटी के लोगों ने नोएडा प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई और लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
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