माफिया से लड़ता रहूंगा, डरने वाला नहीं हूं : रिंकू सिंह राही
हापुड़। मुजफ्फरनगर में समाज कल्याण विभाग में घोटाले का पर्दाफाश करने पर जानलेवा हमले के शिकार हुए पीसीएस अधिकारी रिंकू सिंह राही एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में आए यूपीएससी के परिणाम में उन्होंने 683वीं रैंक हासिल की है। हापुड़ के राजकीय आईएएस-पीसीएस कोचिंग सेंटर के केंद्र प्रभारी के तौर पर तैनात रिंकू सिंह राही का एक और तबादला हो गया है। उनका कहना है कि केंद्र के मेस संचालक के खिलाफ अनियमितता की शिकायत पर उनका तबादला बलिया किया गया है। इन्हीं सब मुद्दों पर जतिन त्यागी ने उनसे बातचीत की है। उनका कहना है कि माफिया से लड़ता रहूंगा, डरने वाला नहीं हूं। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश...
सवाल : मुजफ्फरनगर में आपके ऊपर जानलेवा हमले की क्या वजह रही?
जवाब : मुजफ्फरनगर में शिक्षा माफियाओं की सक्रियता चरम पर थी। पिछले कई सालों की फाइल देखी तो 83 करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश हुआ। काफी दबाव के बाद भी मैं नहीं झुका। शाम को बैडमिंटन खेलते समय माफियाओं ने मेरे ऊपर गोलियां बरसा दी। सात गोलियां शरीर में लगीं। मेरी एक आंख भी इसमें खराब हो गई। जानलेवा हमले से पहले भी माफियाओं ने मेरे साथ मारपीट की थी। तब मैंने समाज कल्याण विभाग की जमीन पर कब्जा हटवाना चाहा था। आज तक भी वह कब्जा नहीं हट सका है।
सवाल : सिस्टम में रहकर भ्रष्टाचार के खिलाफ इस लड़ाई में कितना खतरा है
जवाब : नवंबर 2011 में अग्निशमन विभाग के एक अधिकारी ने घपला खोला था। उसे जबरन पागल घोषित कराकर पागल खाने भेज दिया गया। हालांकि मैं इन सबसे डरने वालों में नहीं हूं। माफिया के खिलाफ लड़ता रहूंगा। वर्ष 2013 में भदोही जिले में जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर रहते हुए भी अपात्रों को योजना का लाभ देने पर एफआईआर कराई थी। इसके बाद चार महीने में ही मेरा ट्रांसफर करा दिया गया। श्रावस्ती में भी जिला समाज कल्याण अधिकारी (विकास) के पद पर गए वहां बोरिंग के काम में अरबों का घोटाला मिला था। हालांकि तत्कालीन एसएसपी ने एफआईआर नहीं होने दी। वहीं करोड़ों का पशुधन लोन घोटाला खोला। इसके बाद वहां से भी ट्रांसफर करा दिया गया। वर्ष 2017 में ललितपुर में वृद्धाश्रम के निर्माण में करोड़ों के घोटाले का राजफाश किया। इसी के चलते मेरे ट्रांसफर भी होते रहे।
सवाल : भ्रष्टाचार के खिलाफ सचिवालय के बाहर आप धरने पर भी बैठे
जवाब : हादसे से उबरने के बाद जब मैं मुजफ्फरनगर ज्वाइन करने गया तब तत्कालीन डीएम ने मुझे ज्वाइन नहीं करने दिया। इसके बाद मेरा ट्रांसफर सीतापुर कर दिया गया। भ्रष्टाचार को मिटाना ही मेरा उद्देश्य था, इसलिए मैंने वहां ज्वाइन नहीं किया। 26 मार्च 2012 को आमरण अनशन की चेतावनी दी। दिल्ली में चल रहे अन्ना हजारे के अनशन में भी मैं शामिल हुआ। अपनी बात को लेकर लखनऊ सचिवालय के बाहर भी धरना दिया लेकिन प्रशासन ने मुझे जबरन हटवा दिया था।
सवाल : आपकी शिक्षा कहां से और किन परिस्थितियों में हुई
जवाब : मेरे परिवार की आर्थिक हालत बेहद कमजोर रही है। अलीगढ़ के डोरीनगर में पिता शिवदान सिंह आज भी चक्की चलाते हैं। कक्षा एक से चार तक की पढ़ाई हाथरस के गांव उसवा स्थित प्राथमिक विद्यालय में हुई। इंटरमीडिएट तक की शिक्षा अलीगढ़ के नौरंगी लाल राजकीय इंटर कॉलेज में हुई। एनआईटी जमशेदपुर से बीटेक किया। पढ़ाई में ठीक होने के कारण छात्रवृत्ति मिलती रही। इसलिए पढ़ाई में आर्थिक समस्या आड़े नहीं आई।
सवाल : इंजीनियरिंग के बाद सिविल सेवा की तरफ रुझान कैसे हुआ
जवाब : भ्रष्टाचार की जड़े जरूरतमंदों के सपनों को कुचलती हैं। गरीब परिवार में जन्म लेने के कारण इस वास्तविकता से मैं परिचित था। जरूरतमंदों तक उनका हक पहुंचा सकूं यही सोचकर सिविल सेवा की तरफ जाने की सोचा। 2004 में पीसीएस की परीक्षा दी थी। उसका अंतिम परिणाम 2007 में आया। 2008 में समाज कल्याण अधिकारी के रूप में मुजफ्फरनगर में पहली तैनाती मिली।
सवाल : हादसे से उबरकर यूपीएससी उत्तीर्ण करने का जज्बा कहां से आया
जवाब : सिस्टम में रहकर भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाने और घोटालों पर नकेल कसने में कभी पीछे नहीं हटना है। मेरा सपना था कि किसी जरूरतमंद का हक न मारा जाए। इसी सपने को साकार करने की चाहत में मैं लगातार पढ़ता रहा। इसी का परिणाम रहा कि यूपीएससी की परीक्षा में 683वीं रैंक हासिल आई।
सवाल : युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे
जवाब : युवाओं को उद्देश्य के साथ अपनी पढ़ाई पूर्ण करनी चाहिए। समर्पण और निष्ठा से किया कोई भी कार्य विफल नहीं होता है। हार या विषम परिस्थितियों से कभी घबराना या विचलित नहीं होना चाहिए। सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ना चाहिए।