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40 करोड़ रुपये खर्च किए, फिर भी गंगा में गिर रहे 23 नाले

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नयाबांस में गंगा में गिरता आबादी का गंदा पानी। - फोटो : GARH
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40 करोड़ रुपये खर्च किए, फिर भी गंगा में गिर रहे 23 नाले
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गढ़मुक्तेश्वर। ब्रजघाट और गढ़ में 40.68 करोड़ की लागत से दो एसटीपी बनने के बावजूद गंगा में 23 नालों का दूषित पानी गिर रहा है। तकनीकी खामी और लापरवाही की वजह से 11 साल से प्लांट लगभग बंद हैं। जल निगम ने एसटीपी संचालित करने वाली संस्था की 3.50 करोड़ की सिक्योरिटी जब्त कर दस करोड़ रुपये से मरम्मत का रिवाइज प्रस्ताव शासन को भेजा है।
गढ़ के नयाबांस में नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत ब्रजघाट में दो एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) 40.68 करोड़ की लागत से 2011 में बनाए गए थे। दोनों प्रोजेक्ट संचालित करने की जिम्मेदारी जयपुर की संस्था आनंदी लाल लालपुरिया को दी गई थी। योजना के तहत गढ़ और ब्रजघाट के मोहल्लों का दूषित पानी गंगा में शोधित होने के बाद गंगा में गिरना था। लेकिन इस मामले में संस्था द्वारा लापरवाही बरती गई। जिसके बाद अधिकतर समय ये प्लांट बंद ही रहे और औचक निरीक्षणों में इसका खुलासा भी होता रहा। इस लापरवाही पर हाल ही में संज्ञान लिया गया और जांच बिठाई गई। लखनऊ से पूरे मामले की जांच चल रही है। 18 जून को भी लखनऊ से आए अधिकारियों ने मामले की जांच की थी।
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निर्माण में तकनीकी खामियां
एसटीपी के निर्माण में भी कई खामिया हैं। कई मोहल्लों के कनेक्शन इससे नहीं जोड़ा गया है। राजीव नगर, महावीर कॉलोनी, रिफ्यूजी कॉलोनी, उपाध्याय नगर, ब्रजघाट समेत विभिन्न कॉलोनियों के सीवर दूषित पानी वापस उगल रहे हैं। जो नालियों के माध्यम से नालों में गिरकर गंगा पहुंच रहा है।
प्रस्ताव मंजूर होते ही होगा काम
एसटीपी की खामियों को दूर करने के लिए गाजियाबाद जल निगम द्वारा 10 करोड़ की लागत का रिवाइज प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। ताकि सीवर लाइन की खामियों को दूर कर प्लांट को दोबारा से सुचारु किया जा सके।-सुनील कुमार, अधिशासी अभियंता, जल निगम।
विधानसभा में उठाया जा चुका है मुद्दा
गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाना केंद्र और प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। क्षेत्र के दोनों एसटीपी बंद होने का मुद्दा विधानसभा में उठाया जा चुका है। जल निगम के खिलाफ कार्रवाई चल रही है। इस बार फिर विधानसभा में यह मुद्दा सख्ती से उठाया जाएगा। - डॉ. कमल सिंह मलिक, विधायक
मैली हो रही गंगा
गढ़ में गंगा के पानी की गुणवत्ता पिछले कुछ वर्षों में घटी है। जल में वर्तमान में पानी में आक्सीजन की मात्रा 9.0 मिलीग्राम प्रति लीटर है। बायो कैमिकल ऑक्सीजन डिमांड 1.1 मिलीग्राम प्रतिलीटर, फीकल कोलीफार्म 130 प्रति 100 मिलीलीटर मिला है।
बड़ी लापरवाही
दो एसटीपी होने के बाद भी गंगा में दूषित पानी का गिरना बड़ी लापरवाही है। सरकार इसे गंभीरता से ले और संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे।-भारत भूषण गर्ग, गंगा सेवक/पर्यावरणविद्
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जल्द चलाएं एसटीपी
गंगा में दूषित पानी की रोकथाम के लिए एसटीपी का निर्माण कराया गया था। प्रशासन को जल्द दोनों एसटीपी चालू कराने चाहिए, गंगा प्रदूषण की रोकथाम जरूरी है। -सरदार राजेंद्र सिंह औलख, पर्यावरणविद्
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