अमानगढ़ से निकल गंगा के सहारे गढ़ तक पहुंच रहे तेंदुए
गढ़मुक्तेश्वर। अमानगढ़ और जिम कार्बेट से निकलकर तेंदुए भोजन की तलाश में गंगा के सहारे दौड़ते हुए गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र तक पहुंच रहे हैं। हस्तिनापुर से ब्रजघाट तक भी वन्य जीव संरक्षित क्षेत्र है। वन्य जीव सरंक्षण क्षेत्र में 50 तेंदुओं की मौजूदगी का का दावा वन विभाग भी कर रहा है। घने जंगलों से निकल यह तेंदुए अक्सर आबादी की तरफ बढ़ जाते हैं।
दस दिन से अधिक बीत गए गढ़ क्षेत्र के गांव पावटी, झडीना, नयागांव इनायतपुर, दौताई समेत अन्य कई गांवों के जंगलों में ग्रामीणोें ने तेंदुए दिखाई देने की सूचना वन विभाग तक पहुंचाई है। वन विभाग एक भी तेंदुए को पकड़ नहीं सका है। तेंदुआ बिजनौर के अमानगढ़ टाइगर रिजर्व और उत्तराखंड के जिम कार्बेट पार्क समेत नदियों के तराई क्षेत्र में पाया जाता है। जानवर है। तराई क्षेत्रों और घने जंगलों में मानव की घुसपैठ और शिकार की कमी के चलते तेंदुए समेत अन्य जंगली जानवर निचले जंगलों और खेतों में भी अपना ठिकाना बनाने लगे हैं। वहीं बरसात के मौसम में नदियों में बाढ़ आने और जंगलों में पानी भरने से भी तेंदुए जैसे जानवर आबादी से सटे जंगलों में पहुंच जाते हैं।
तराई क्षेत्रों में वन और भांवर घास हो रही खत्म
पूर्व वन क्षेत्राधिकारी अशोक चौधरी बताते हैं कि कि तेंदुए जैसे जानवर तराई के वनों में उगने वाली भांवर घास, पटेरा आदि में निवास करना अधिक पसंद करते हैं। ऐसे इलाकों में खरगोश, हिरण, नील गाय जैसे पशु उनके शिकार के लिए पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध थे। लेकिन वनों का कटान होने के साथ ही भांवर घास और पटेरा के जंगलों के भी खत्म होने से जंगली पशुओं के छिपने के स्थान और भोजन की कमी हो गई।
गन्ने के घने खेत बने आशियाना
टाइगर गार्जियन भारत भूषण ने बताया कि गन्ने की फसल की कटाई नवंबर से मई माह के बीच की जाती है। गन्ने की बुआई और फसल तैयार होने में दस माह का समय लगाता है। इस दौरान तेंदुए समेत अन्य जंगली जानवरों को गन्ने की फसल में छिपने और प्रजनन करने का पर्याप्त समय मिल जाता है। वहीं लोमड़ी, नीलगाय, खरगोश, हिरण, जंगली बिल्ली, कुत्ते समेत अन्य छोटे जीव शिकार के लिए भी बड़ी संख्या में उपलब्ध होते हैं। जिसके चलते बरसात के मौसम में तेंदुए गन्ने की खेती के सघन क्षेत्र को अपना निवास बना रहे हैं। इन दिनों गन्ने की फसल कट चुकी है। इसीलिए इस वजह से भी तेंदुए कई बार आबादी में घुस आते हैं।
हिंसक नहीं हैं तेंदुए, छेड़ने पर करते हैं हमला
टाइगर गार्जियन भारत भूषण गर्ग ने बताया कि तेंदुए हिंसक नहीं होते, केवल छोटे जानवरों का शिकार कर अपना पेट भरते हैं। जब तक इन्हें छेड़ा न जाए मनुष्य पर हमला नहीं करते। वहीं अशोक चौधरी ने बताया कि केवल चीता हिंसक जीव है, जो बिना छेड़े भी हमला कर सकता है।
वन्य जीव सरंक्षण क्षेत्र में 50 तेंदुए मौजूद
हस्तिनापुर से ब्रजघाट तक वन्य जीव संरक्षित क्षेत्र है। जिसमें अन्य जानवरों के साथ ही करीब 50 तेंदुए भी मौजूद हैं। जो आवास के लिए सुरक्षित स्थान और भोजन की तलाश में इधर-उधर विचरण करते रहते हैं। तेंदुआ 24 घंटे में 30 किलोमीटर तक विचरण करता है। -मोहन सिंह बिष्ट, वन क्षेत्राधिकारी गढ़