हापुड़। अधिकारियों की सख्ती और खुफिया नेटवर्क को धता बताकर उर्वरक माफिया हापुड़ को नकली डीएपी और पोटाश तैयार करने का हब बना चुके हैं। यहां तैयार नकली खाद दूसरे जिलों और राज्यों में आसानी से सप्लाई हो रही है। हाल ही में हरियाणा के नूंह में पकड़े गए नकली उर्वरक रैकेट के तार भी हापुड़ से जुड़े मिलने के बाद कृषि विभाग में हड़कंप मचा है।
नूंह के डीएसपी हरदीप सिंह ने नकली उर्वरक का कारोबार करने वाले रैकेट का पर्दाफाश किया। जांच में दावा किया गया कि नकली खाद हापुड़ से आती थी। माफिया अनुदानित उर्वरकों के खाली कट्टों में नकली डीएपी और यूरिया भरकर किसानों को बेच रहे थे। इस खुलासे ने हापुड़ के कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
24 अक्तूबर को पकड़ी गई थीं तीन फैक्टरियां
जिला कृषि अधिकारी गौरव प्रकाश ने 24 अक्तूबर 2025 को मोदीनगर रोड पर सीएमओ कार्यालय के सामने नकली डीएपी और पोटाश बनाने की तीन फैक्टरियां पकड़ी थीं। मौके से करीब तीन हजार कट्टे बरामद कर फैक्टरियों को सील किया गया था। फैक्टरियों में मिले बिलों से पुष्टि हुई थी कि नकली उर्वरक राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा समेत यूपी के कई जिलों में सप्लाई होता था। छापेमारी में नकली न्यूट्रेशन के पैकेट भी पकड़े गए थे।
घेरू और नमक से बन रहा नकली डीएपी
मोदीनगर रोड पर छापेमारी के दौरान सामने आया कि नकली उर्वरक बनाने के लिए लाल घेरू, चाइना निर्मित ह्यूमिक एसिड, मेग्नीशियम सल्फेट, सिंथेटिक आयरन और नमक का इस्तेमाल हो रहा था। माफिया महज 50 रुपये की लागत में 1800 रुपये वाला डीएपी का कट्टा तैयार कर रहे थे। इससे किसानों को भारी नुकसान और फसल को खतरा हो रहा है।
लाखों खाली कट्टे हो चुके हैं बरामद
तत्कालीन जिला कृषि अधिकारी मनोज कुमार और वर्तमान जिला कृषि अधिकारी गौरव प्रकाश चार बार छापेमारी कर लाखों खाली कट्टे बरामद कर चुके हैं। इन कट्टों पर भारतीय जन उर्वरक परियोजना संबंधी प्रिटिंग मिली, जो अनुदानित यूरिया और डीएपी के कट्टों पर होती है। कई मामलों में एफआईआर भी दर्ज कराई गई, लेकिन नकली खाद का कारोबार रुक नहीं रहा।
विभाग का दावा : कार्रवाई जारी
जिला कृषि अधिकारी गौरव प्रकाश ने कहा कि उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने और नकली उर्वरक का कारोबार बंद कराने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। अब तक पांच से अधिक एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी हैं। मोदीनगर रोड पर फैक्टरियां सील करने के बाद अब टीमें बनाकर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। नूंह प्रकरण के बाद अधिकारी अलर्ट मोड पर हैं। मगर जिस तरह से हापुड़ से दूसरे राज्यों तक नकली खाद पहुंच रही है, उससे साफ है कि माफियाओं ने विभाग की सख्ती को चुनौती दे रखी है।