गाजियाबाद। व्यापारिक लेनदेन में फर्जीवाड़ा करने वाली फर्मों पर जीएसटी विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जनपद में फर्जी कारोबार दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का गलत लाभ लेने वाली फर्मों की बड़े स्तर पर जांच की जा रही है। इस वर्ष अब तक 50 से अधिक फर्मों पर कार्रवाई की जा चुकी है। विभाग अब ऐसी फर्मों के डिजिटल डाटा, बैंकिंग ट्रांजेक्शन और ई-वे बिल रिकॉर्ड खंगाल रहा है।
अतिरिक्त आयुक्त जीएसटी विभाग मोनू त्रिपाठी ने बताया कि कई फर्में बिना वास्तविक माल आपूर्ति के केवल कागजों में कारोबार दिखाकर आईटीसी क्लेम कर रही थीं। विभाग को लगातार ऐसी गतिविधियों की शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद विशेष अभियान चलाकर संदिग्ध फर्मों की पहचान की गई।
फर्जी आईटीसी क्लेम से सरकार को होता है राजस्व नुकसान
अधिकारियों के अनुसार, फर्जी आईटीसी क्लेम से सरकार को बड़े स्तर पर राजस्व का नुकसान होता है। इसी वजह से विभाग अब डेटा एनालिटिक्स और तकनीकी निगरानी का सहारा लेकर संदिग्ध कारोबारियों तक पहुंच रहा है। जिन फर्मों के लेनदेन संदिग्ध पाए जा रहे हैं, उन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज किया जाएगा। कारोबारियों से भी अपील की गई है कि वे केवल वास्तविक व्यापारिक लेनदेन करें और किसी भी प्रकार की फर्जी बिलिंग से बचें।
900 करोड़ से अधिक की कर चोरी पकड़ी गई
पिछले वर्ष एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच सीजीएसटी के छापों में 900 करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी पकड़ी जा चुकी है। इनमें से 100 करोड़ रुपये सरकार के खाते में जमा कराए गए हैं। करीब 10 दिन पहले सीजीएसटी के छापे में 10 करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी पकड़ी गई थी। दो दिन पहले ट्रांस हिंडन क्षेत्र में बिना पंजीकरण के आवासीय इलाके में चल रही पान मसाला फैक्टरी पर छापा मारकर 17 करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी का खुलासा हुआ।