गाज़ियाबाद। स्क्रैप कारोबार में खरीद-फरोख्त का ब्योरा छिपाने वाली फर्में अब जीएसटी विभाग के निशाने पर हैं। विभाग की ओर से लोनी में की गई कार्रवाई में एक करोड़ 15 लाख की कर चोरी पकड़ी गई। विभाग पर अन्य स्क्रैप कारोबारियों के गोदामों और दफ्तरों की रेकी करा रहा है। फर्मों के लेनदेन और जीएसटी रिटर्न की जांच शुरू की गई है। जीएसटी कमिश्नर ग्रेड वन अजय कुमार गौतम ने बताया कि प्राथमिक जांच में कुछ कारोबारियों के रिटर्न में दर्ज खरीद और बिक्री के आंकड़ों में अंतर आ रहा है।
स्क्रैप कारोबार में बड़ी मात्रा में माल की खरीद-बिक्री होती है। इसमें लोहे, स्टील, एल्युमिनियम, तांबा समेत विभिन्न धातुओं के स्क्रैप का कारोबार शामिल है। विभाग को आशंका है कि कुछ कारोबारी वास्तविक कारोबार की तुलना में कम खरीद-बिक्री दर्शाकर टैक्स देनदारी कम करने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में विभाग रिटर्न में घोषित कारोबार का मिलान ई-वे बिल, खरीद-बिक्री के दस्तावेज और अन्य उपलब्ध कारोबारी सूचनाओं से कर रहा है। वहीं, फर्जी बिलिंग, बिना माल के लेनदेन और इनपुट टैक्स क्रेडिट के गलत इस्तेमाल की भी जांच की जा रही है। जिले में 20 से ज्यादा स्क्रैप के बड़े कारोबारी हैं। दिल्ली-एनसीआर से वाहन या कबाड़ खरीदते हैं। इनके पंजीकरण की जांच की जा रही है।
ई-वे बिल से खुलेगा खरीद-बिक्री का हिसाब
जीएसटी कमिश्नर का कहना है कि जांच में ई-वे बिल अहम आधार बन सकते हैं। किसी फर्म ने जितना माल मंगाया या भेजा, उसके मुकाबले रिटर्न में कितना कारोबार दिखाया गया, इसका मिलान किया जा रहा है। आंकड़ों में बड़ा अंतर मिलने पर कारोबारी से दस्तावेज और लेनदेन का स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है।