शहर में बने फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) पर जनता ने लिफ्ट और एस्केलेटर मांगा तो निगम ने एक बार फिर पब्लिक को जांच का ‘लॉलीपॉप’ थमा दिया। शहर में बने सभी एफओबी के अनुबंध की शर्तों और मौके पर हुए काम की जांच के लिए मेयर और नगर आयुक्त ने पार्षदों व अफसरों की संयुक्त जांच कमेटी गठित की है।
यह कमेटी 10 दिन में जांच पूरी कर नगर आयुक्त को रिपोर्ट देगी। निगम अफसरों ने अनुबंध के मुताबिक काम न मिलने पर कांट्रेक्ट निरस्त करने का दावा किया है।यह हाल तब है जब निगम अधिकारियों को बखूबी जानकारी है कि अभी किसी भी फुटओवर ब्रिज को कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया है,
लेकिन सभी ने वर्षों पहले विज्ञापन लगाना शुरू कर दिया था। यही नहीं पूर्व में निगम अफसरों ने खुद सदन में बताया था कि अधिकांश एफओबी पर लिफ्ट या एस्केलेटर लगाए जाएंगे। अनुबंध में इनका प्रावधान किया गया है।
अब बीते 10 नवंबर को हुई निगम की बोर्ड बैठक में अफसरों ने एफओबी पर लिफ्ट या एस्केलेटर की बजाय साधारण रैंप बनाने का बयान देकर पार्षदों को चौंका दिया। निगम अधिकारियों ने सदन को एफओबी पर लगे विज्ञापन तत्काल हटाने का आश्वासन भी दिया था, लेकिन 14 दिन बीत जाने के बावजूद विज्ञापन तक नहीं हटे।
अब महापौर की ओर से भाजपा पार्षद अनिल स्वामी, धीरेंद्र यादव, सुल्तान सिंह खारी, राजेंद्र तितोरिया, आदिल मलिक और नगर आयुक्त ने बीओटी प्रभारी अरुण कुमार गुप्त, संयुक्त नगर आयुक्त एसके तिवारी, अधिशासी अभियंता एसएस चौहान और अवर अभियंता योगेश कुमार को जांच कमेटी में नामित किया है।
महापौर का कहना है कि यह कमेटी 10 दिन में रिपोर्ट देगी। उसके आधार पर बीओटी फर्मों पर कार्रवाई की जाएगी।