1000-500 के नोट चलन से बाहर हुए तो ट्रेनों में सफर करने वाले लोगों की दिक्कतें भी बढ़ी। छुट्टे रुपये न होने की वजह से बुकिंग काउंटर्स पर टिकट नहीं मिल रहे। ऐसे में अक्सर ट्रेनों में सफर करने वाले लोग अब लंबी अवधि की एमएसटी (मासिक सीजन पास) बनवा कर 500 के नोटों को जमा करा रहे हैं।
गाजियाबाद से दिल्ली, फरीदाबाद, मेरठ, मुरादाबाद, अलीगढ़, आने-जाने वाले यात्रियों को ज्यादा दिक्कत हो रही थी। जनरल टिकट लेने के लिए उनके पास खुले रुपये नहीं है। रेलवे काउंटर्स पर यूं तो 500-1000 के नोट स्वीकार किए जाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन छुट्टे रुपये न होने की बात कहकर रेलवे कर्मचारी हाथ खड़े कर रहे हैं।
ऐसे में यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस परेशानी के चलते सैंकड़ों यात्री तो बिना टिकट लिए ही लौट जाते हैं। रोजाना या अक्सर ट्रेनों में सफर करने वाले ऐसा भी नहीं कर सकते। इसके चलते अब वह तीन-तीन महीने की एमएसटी बनवा रहे हैं।1000-500 के नोट बंद हुए तो रेलवे के अधिकारी-कर्मचारी भी अपने नोटों को बदलवा रहे हैं।
नोट बंदी के आदेश आते ही नोटों के बदलवाने का सिलसिला शुरू हो गया था और अभी तक जारी है। अब बुकिंग काउंटर्स पर 100 के नोटों का आना कम हुआ तो रेलवे की ओर से दिए गए प्राइवेट टिकट काउंटर्स से नोट बदलवाए जा रहे हैं। रेलवे सूत्रों ने बताया कि प्राइवेट टिकट काउंटर्स पर अब सिर्फ 100-50 या इससे कम के नोट स्वीकार किए जा रहे हैं।
1000-500 के नोट यहां नहीं लिए जा रहे, लेकिन रेलवे अधिकारियों तक पहुंचते-पहुंचते यह नोट 1000-500 में तब्दील हो जाते हैं। सूत्रों की मानें तो रेलवे अधिकारी और कर्मचारी इस कैश को बदल लेते हैं। हालांकि अधिकारी इससे इंकार कर रहे हैं।