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सातवीं बार फोन उठा तब मिली श्वेता की दर्दनाक मौत की खबर

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सातवीं बार में फोन उठा तो मिली श्वेता की मौत की खबर
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वसुंधरा। वसुंधरा सेक्टर-4 की वार्तालोक सोसायटी की सीनियर इंटीरियर डिजाइनर श्वेता सिंह की मां वैष्णो देवी धाम में मची भगदड़ में दर्दनाक मौत हो गई। हादसे में उसकी बहन सरिता सिंह भी घायल हो गई। श्वेता बहन और सोसायटी के छह लोगों के साथ बस से 26 दिसंबर को कटरा गई थीं। वह नए साल के पहले दिन वैष्णो देवी के दर्शन करना चाहती थीं। परिवार के परिचित दिवान सिंह ने बताया कि भगदड़ की जानकारी पर उन्होंने श्वेता और सरिता को कॉल की। छह बार फोन नहीं उठा। 15 मिनट बाद सरिता के भाई राकेश ने सातवीं बार कॉल की तो जम्मू एंड कश्मीर के एक पुलिसकर्मी ने फोन उठाया और श्वेता की मौत की खबर दी। इसके बाद राकेश फ्लाइट से जम्मू रवाना हो गए।
वसुंधरा निवासी श्वेता सिंह की शादी औरेया निवासी विक्रांत सिंह से 29 नवंबर 2017 में हुई थी। विक्रांत मर्चेंट नेवी में हैं और इन दिनों इंडोनेशिया में तैनात हैं। परिवार में भाई राकेश कुमार, भाभी, 12 वर्षीय भतीजा और 21 वर्षीय भतीजी हैं। बहन सरिता सिंह क्रॉसिंग रिपब्लिक की एक सोसायटी में परिवार के साथ रहती हैं। उनके परिवार के परिचित दिवान सिंह ने बताया कि श्वेता सिंह दिल्ली के कनॉट प्लेट में एक एसोसिएट ऑफिस में सीनियर इंटीरियर डिजाइनर के तौर पर 2007 से कार्यरत हैं। 26 दिसंबर को श्वेता बहन सरिता और सोसायटी के छह लोगों के साथ वैष्णो देवी दर्शन करने के लिए निकलीं। ट्रेन से यात्रा ना होने के कारण सभी बस से गए थे। सभी लोगों ने पैदल ही चढ़ाई की और रात में नहाने के बाद 31 दिसंबर रात को दर्शन करने के लिए कतार में लग गए। सरिता और श्वेता दोनों भवन से अलग-अलग हो गईं। इस बीच अचानक वहां भगदड़ मच गई, जिसमें दोनों को संभलने में देर हो गई। भीड़ की धक्कामुक्की में श्वेता नीचे गिर गईं। कई लोग उन्हें रौंदते हुए निकल गए। जबकि सरिता सीढ़ियों के पास गिरी हुई थीं। उनके ऊपर भी कई लोग गिरे गए थे। वह मदद के लिए चिल्ला रही थीं, लेकिन किनारे होने के कारण बच गईं। केंद्रीय सुरक्षा बल और वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के पदाधिकारियों ने भीड़ को किसी तरह काबू किया। घायलों को तत्काल कटरा के स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। जहां श्वेता सिंह को मृत घोषित कर दिया गया। जबकि सरिता सिंह के पैर और हाथ में गंभीर चोट आई है। 12 घंटे बाद चिकित्सकों ने सरिता को छुट्टी दे दी।
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श्वेता के व्यवहार के सब थे कायल
श्वेता सिंह का व्यवहार हंसमुख था। वह हर किसी की मदद करने को हमेशा तैयार रहती थीं। ऑफिस से लेकर सोसायटी तक हर कोई उनसे हर काम के लिए सलाह लेता था। दिवान सिंह बताते हैं कि घर पर आने वाले हर किसी का मान-सम्मान करना, श्वेता का प्रथम कर्तव्य होता था। वह अपने मायके में ही रहती थीं। पति विक्रांत दशहरे पर श्वेता और परिवार से मिलने के लिए वसुंधरा आए थे। कई दिन तक दोनों बाहर भी घूमने गए थे।
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मां को नहीं दी श्वेता के मौत की सूचना
शनिवार शाम तक मां उर्मिला (68) को छोटी बेटी श्वेता की मौत की खबर नहीं दी गई। घर पर दिनभर रिश्तेदार और मिलने-जुलने वालों का तांता लगा रहा। इंदिरापुरम थाने से वसुंधरा चौकी इंचार्ज यतेंद्र कुमार परिवार से घटना की जानकारी लेने पहुंचे। श्वेता के भाई राकेश शव लेने के लिए फ्लाइट से जम्मू रवाना हो गए हैं। वहां से एंबुलेंस में शव को लेकर वह गाजियाबाद के लिए बैठ गए। करीब 14-15 घंटे की यात्रा कर रविवार सुबह तक एंबुलेंस सोसायटी पहुंचेगी।
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