रेलवे ने न माना एनजीटी का आदेश, नाले से जोड़ा टॉयलेट
गाजियाबाद। रेलवे ने विजय नगर एंट्री प्वाइंट पर सार्वजनिक शौचालय तो बनवा दिया, लेकिन एनजीटी के आदेश को ताक पर रखकर आउटलेट नाले में जोड़ दिया। अब सीवरेज को नाले में डाला जा रहा है। अब बदबू के कारण आरपीएफ के जवानों और रेलवे कर्मचारियों को ड्यूटी करना मुश्किल हो गया है। यात्रियों को भी परेशानी हो रही है। विजय नगर के लोगों ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।
विजय नगर में पिछले कुछ माह पूर्व ही रेलवे ने सार्वजनिक शौचालय के संचालन का कांट्रेक्ट प्राइवेट फर्म को दिया है। फर्म ने शौचालय के आउटलेट को भूड़ भारत नगर के सीवरेज से जोड़ने की बजाय नाले में डाल दिया। शौचालय के लिए सेप्टिक टैंक बनवाया गया है, लेकिन इसकी क्षमता कम है। इससे सीवरेज ओवरफ्लो होकर नाले में बह रहा है। यह सीवरेज नाले से होते हुए सीधे हिंडन में पहुंच रहा है। यह हाल तब है जब एनजीटी के आदेश हैं कि सीवरेज को नालों में नहीं डाला जा सकता है। बावजूद इसके रेलवे के अधिकारी और सार्वजनिक शौचालय के संचालक आदेशों को दरकिनार कर रहे हैं।
रेलवे के टॉयलेट को नियमों के विपरीत सीवर लाइन की बजाय नाले से जोड़ दिया गया है। इससे स्टेशन पर आते ही भीषण दुर्गंध से परेशानी होने लगती है। रेलवे अधिकारी ही नियमों को तोड़ रहे हैं।
- सुदीप साहू, विजयनगर निवासी
विजयनगर एंट्री प्वाइंट पर लगे स्कैनर पर ड्यूटी देना मुश्किल हो जाता है। इसके ठीक पीछे शौचालय का आउटलेट नाले में डाला गया है। बदबू की वजह से यहां 8 घंटे तो दूर 10 मिनट भी रुकना मुश्किल है।
- मुकेश कुमार चौहान, आरपीएफ स्टाफ
यात्रियों को लेने के लिए ऑटो लेकर काफी देर तक स्टेशन पर खड़े रहना पड़ता है, लेकिन यहां भीषण बदबू रहती है। शौचालय के आउटलेट को सीवर लाइन में डाला जाना चाहिए। यात्रियों की भी परेशानी को नहीं समझा गया।
- रामबहादुर सिंह, ऑटो चालक
शौचालय संचालक मनमानी कर रहा है। सिर्फ आउटलेट के लिए ही नियमों को नहीं तोड़ा गया है, यहां यूरिनल इस्तेमाल करने के लिए भी पांच-पांच रुपये वसूले जा रहे हैं। वसूली पर रेलवे अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे।
- जलालुद्दीन, स्थानीय निवासी
कोट
रेलवे का शौचालय है, नगर निगम की सीवर लाइन में नहीं जोड़ा जा सकता। अब आउटलेट पाइप को 40 फीट आगे डाला जाएगा। इसके बाद लोगों को उसकी दुर्गंध नहीं आएगी। - रूपनारायण सिंह, सीएमआई