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सात दिन में देने होंगे दस्तावेज, नहीं तो एलआर कॉलेज की मान्यता खतरे में

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सात दिन में देने होंगे दस्तावेज, नहीं तो एलआर कॉलेज की मान्यता खतरे में
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गाजियाबाद। साहिबाबाद के एलआर पीजी कॉलेज को चौधरी चरणसिंह विश्वविद्यालय ने कड़ी फटकार लगाई है। सीसीएसयू ने विवि में बंधक एलआर कॉलेज की 54046 वर्ग गज जमीन पर आईएमटी गाजियाबाद के संचालन, कॉलेज भूमि की माप व राजस्व अभिलेखों सहित सात बिंदुुओं पर एलआर कॉलेज से जानकारी मांगी थी। विवि के आदेशों का उल्लंघन कर कॉलेज ने न तो कोई सूचना विवि को उपलब्ध कराई। दूसरी ओर सूचनाएं देने के लिए 45 दिन और मांगे है। इस पर नाराजगी जताते हुए विवि ने एलआर कॉलेज को अभिलेखों को जमा कराने के लिए सात दिन दिए है।
विवि ने एलआर कॉलेज प्रबंधन को भेजे गए पत्र में साफ कहा है कि अगर समयसीमा के अंदर सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराई जाती हैं तो नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएंगी। एलआर कॉलेज प्रबंधन समिति को भेजे गए पत्र में विवि ने कॉलेज की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि कॉलेज से मांगे गए अभिलेख व सूचनाएं पत्रावलियों से संबंधित हैं। ऐसे में उनका सुरक्षित होना जरूरी है। विवि ने कहा है कि कांवड़ यात्रा के चलते गाजियाबाद के सभी कॉलेज बंद थे। शैक्षणिक कार्य बंद होने के कारण सभी अभिलेखों व सूचनाओं को आसानी से एकत्रित किया जा सकता था। विवि ने साफ किया है कि कॉलेज अपने स्तर पर मामले के निस्तारण की जगह देरी करने व टालने का उद्देश्य कर रहा है। एलआर कॉलेज की मंशा अभिलेख व सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराने की है। 45 दिन मांगने से यही सिद्ध होता है। ऐसे में कॉलेज को त्वरित कार्रवाई करने व सात दिनों के अंदर हर हाल में मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है। विवि के रवैये से एलआर पीजी कॉलेज की मान्यता पर खतरा मंडरा रहा है।
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विवि ने एलआर कॉलेज की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
विवि कुलसचिव की ओर से एलआर कॉलेज प्रबंधन को पहले भेजे गए पत्र में कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे। विवि के मुताबिक कॉलेज की लाजपत राय स्मारक महाविद्यालय सोसाइटी ने एलआर कॉलेज की मान्यता के लिए जीडीए से 1971 में 90 वर्ग की लीज पर जमीन ली गई थी। इसके लिए कॉलेज के विकास शुल्क से 96606 रुपये का भुगतान किया गया था। भूमि पर वर्तमान में आईएमटी नामक संस्था चल रही है, जबकि यह जमीन विवि में संबद्धता की शर्तों के अनुसार अब तक बंधक है। ऐसे में विवि की अनुमति व बगैर अनुमोदन के कॉलेज ने किस अधिनियम के तहत यह जमीन आईएमटी को दी, यह स्पष्ट करना होगा। विवि ने कहा है कि कॉलेज की स्थापना के समय सोसाइटी का नाम लाजपत राय स्मारक महाविद्यालय सोसाइटी था, लेकिन फिर विवि की अनुमति के बगैर सोसाइटी का नाम बदलकर लाजपत राय कॉलेज सोसाइटी और तीसरी बार लाजपत राय एजूकेशनल सोसाइटी कर दिया गया। कॉलेज प्रबंधन के यह परिवर्तन प्रथम सोसाइटी द्वारा निर्धारित नियमों और विनियम का साफ उल्लंघन है। विवि ने इस संबंध में कोई अनुमति प्रदान नहीं की, न ही बदलाव के बाद कॉलेज प्रबंधन ने कोई अनुमोदन कराया। यह भी सरासर मान्यता की शर्तों का उल्लंघन है।
शासन को भेजनी है विवि को रिपोर्ट
भाजपा पार्षद राजेंद्र त्यागी ने एलआर पीजी कॉलेज की जमीन पर राजनगर स्थित आईएमटी गाजियाबाद के निर्माण की जांच को मुख्यमंत्री व राज्यपाल से शिकायत की थी। शिकायत को संज्ञान में लेकर राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को समुचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। जमीन विवि में बंधक होने से सीसीएसयू ने भी जांच को चार सदस्यीय कमेटी गठित की थी। अब विवि को राज्यपाल कार्यालय को सभी सूचनाएं देनी हैं।
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11503 वर्ग मीटर अतिरिक्त जमीन का शासन में मामला
आईएमटी में अवैध रूप से कब्जे वाली 11503 वर्ग मीटर जमीन का आवंटन पहले रद्द हो चुका है। आईएमटी प्रबंधन की याचिका पर हाईकोर्ट ने शासन को भू-आवंटन पर पुनर्विचार करने के निर्देश दिए थे। शासन के निर्देश पर आईएमटी प्रबंधन ने जीडीए में 5 करोड़ जमा करा दिए हैं। ऐसे में अब जल्द ही प्रमुख सचिव आवास की ओर से इस मामले में फैसला लिया जाना है। बता दें कि जीडीए सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी के सामने जमीन संबंधी कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने के चलते प्राधिकरण ने आईएमटी के कब्जे वाली 11503 वर्ग मीटर जमीन का आवंटन निरस्त करने की कार्रवाई थी।
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