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कूड़ा उठाने में हर माह हो रहा 17 लाख का खेल, सिर्फ कागजों में दौड़ रहीं गाड़ियां

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कूड़ा उठाने में हर माह हो रहा 17 लाख का खेल, सिर्फ कागजों में दौड़ रहीं गाड़ियां
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गाजियाबाद। नगर निगम में स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर भी ‘खेल’ शुरू हो गया है। डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए लगाई गई 82 प्राइवेट गाड़ियों में से 50 फीसदी वाहनों का संचालन सिर्फ कागजों में किया जा रहा है। इनके नाम पर करीब 17 लाख का खेल हर महीने किया जा रहा है। घरों से कूड़ा कलेक्शन करने वाली गाड़ियां कॉलोनियों में दो-तीन दिन छोड़कर पहुंच रही हैं और भुगतान पूरा ले रही हैं। पहले कॉलोनियों के लोग इसकी शिकायत कर रहे थे, लेकिन अब पार्षदों ने भी शिकायत शुरू कर दी है। आरोप है कि इस खेल में निगम कर्मचारी भी शामिल हैं।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर को स्वच्छ बनाने के लिए नगर निगम ने अपनी गाड़ियों के अलावा किराए पर वाहन लिए थे। निगम ने 82 छोटे हाथी 43 हजार रुपये प्रति माह के किराए पर लिए हैं, ताकि सभी वार्डों में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन किया जा सके। प्रत्येक वार्ड में दो-दो गाड़ियां तैनात की गई हैं, लेकिन बीते कई माह से नगरायुक्त का तबादला हुआ तो ठेकेदारों और नगर निगम कर्मचारियों ने कूड़ा उठान में भी खेल शुरू कर दिया है। पहले तो सिर्फ तेल की चोरी की जाती थी, लेकिन अब तो पूरे वाहनों को ही कागजों में चलाया जा रहा है।
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ऐसे लगा रहे निगम को चूना
पार्षदों का आरोप है कि प्राइवेट ठेकेदार और नगर निगम के कुछ कर्मचारियों व अफसरों की मिलीभगत से बड़े ही गुपचुप तरीके से चूना लगाया जा रहा है। नगर निगम ठेकेदार वार्ड में तैनात की गई दो में से एक गाड़ी को वार्ड में भेज देता है, दूसरी को गैराज में खड़ी कर देता है। इससे वार्ड के लोगों को भी लगता है कि उन्होंने क्षेत्र में गाड़ी को संचालित होते देखा है। जबकि दूसरी गाड़ी की बचत कर नगर निगम से पूरा भुगतान किया जा रहा है।
क्यों नहीं लगाया गया जीपीएस सिस्टम
नगर निगम ने अपने वाहनों में तो जीपीएस सिस्टम लगाए हुए हैं। इनकी निगरानी भी प्रतिदिन की जा रही हैं, लेकिन प्राइवेट ठेकेदारों से किराए पर लिए गए वाहनों में जीपीएस सिस्टम नहीं लगाया गया है। महापौर आशा शर्मा भी पूर्व में जीपीएस लगवाने के निर्देश दे चुकी हैं, लेकिन अभी तक इस पर अमल नहीं हुआ। वाहनों में जीपीएस लगाया गया तो उनके प्रतिदिन चलने की जानकारी अधिकारियों और मेयर के पास रहेगी और खेल नहीं हो सकेगा।
आंकड़ों में नगर निगम की व्यवस्था
शहर के कुल वार्ड 100
प्रतिदिन निकलने वाला कचरा एक हजार मीट्रिक टन
वार्डों में कूड़ा कलक्शन के वाहन 200
ठेके पर लिए गए वाहन 82 छोटे हाथी
परिचर्चा
मेरे वार्ड-53 में घरों से कूड़ा कलेक्शन वाली एक गाड़ी मार्च और अप्रैल माह में नहीं हुई। मई माह में आई, लकिन जुलाई में नहीं आई। अब 25 जुलाई से दोनों गाड़ियां आनी शुरू हुई हैं, लेकिन इसमें भी दो दिन की छुट्टी हो गई है। कूड़ा कलेक्शन के नाम पर बड़ा खेल किया जा रहा है। - मनोज चौधरी, कांग्रेस पार्षद
मेरे वार्ड में कई-कई दिन तक कूड़ा कलेक्शन गाड़ियां नहीं आती हैं। ठेकेदार को फिर भी पूरा भुगतान किया जा रहा है। नगर निगम में हर माह करीब 20 लाख रुपये का घोटाला कूड़ा कलेक्शन के नाम पर किया जा रहा है। बोर्ड बैठक में मुद्दा उठाएंगे। - नरेश जाटव, बसपा पार्षद
वार्ड में एक गाड़ी तो निरंतर आती है, लेकिन दूसरी गाड़ी नहीं आती। उसके लिए निगम अधिकारियों या ठेकेदार को फोन करना पड़ता है। जिस दिन फोन करते हैं, उस दिन दूसरी गाड़ी आ जाती है, लेकिन अन्य दिनों में नहीं आती। निगम को चूना लगाया जा रहा है। - आसिफ चौधरी, सपा पार्षद
जिन वार्ड में किसी दिन गाड़ी नहीं जाती, उस दिन का पैसा काट दिया जाता है। अब आदेश जारी कर दिए हैं कि पार्षद से वेरिफिकेशन के बाद ही गाड़ी का भुगतान किया जाएगा। - वीपी शर्मा, प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी
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कुछ वार्ड में गाड़ी कभी कभी नहीं जाने की शिकायत मिलती है। इसकी जांच कराई जाएगी। सभी निजी वाहनों में जीपीएस लगाना अनिवार्य किया जाएगा, ठेकेदार ने जीपीएस नहीं लगवाया तो वाहनों को हटा दिया जाएगा। - आशा शर्मा, महापौर
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