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गैर मान्यता प्राप्त ४४ स्कूलों को नोटिस, खतरे में तीन हजार बच्चों का भविष्य

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गैर मान्यता प्राप्त 15 स्कूल सीज, 29 को नोटिस, तीन हजार विद्यार्थियों का भविष्य अधर में
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गाजियाबाद। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने गैर मान्यता प्राप्त 15 विद्यालयों को सीज कर दिया है। जबकि 29 विद्यालयों को नोटिस देकर एक सप्ताह के अंदर बंद करने के आदेश दिए हैं। चेतावनी दी है कि विद्यालय बंद नहीं हुए तो संबंधित स्कूल संचालक और शिक्षक-शिक्षिकाओं के खिलाफ एफआइआर दर्ज की जाएगी। 44 विद्यालयों में करीब तीन हजार छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इन बच्चों का भविष्य अंधकार में दिखाई दे रहा है।
बेसिक शिक्षा अधिकारी राजेश श्रीवास ने बताया कि जिले में लगातार गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों की शिकायतें मिल रही थीं। संबंधित ब्लाक के खंड शिक्षा अधिकारियों को ऐसे स्कूलों की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए थे। खंड शिक्षा अधिकारियों न अपने-अपने ब्लाक के स्कूलों की रिपोर्ट तैयार करके बीएसए को सौंप दीं। जिले में करीब 60 से अधिक विद्यालय गैर मान्यता प्राप्त पाए गए, जिनमें से कुछ ने स्वयं ही विद्यालय बंद कर लिए। बाकी 44 विद्यालय बिना मान्यता के अभी भी जिले में संचालित हो रहे हैं। बताया कि 15 विद्यालयों को सीज कर दिया गया है। 29 विद्यालयों को नोटिस जारी किया गया है। बीएसए ने शेष विद्यालयों को भी एक सप्ताह के अंदर बंद कराने के निर्देश दिए हैं। यदि विद्यालय नोटिस देने के बाद भी खुले पाये जाते हैं तो संचालक के खिलाफ एफआइआर और भारी जुर्माना भी लगेगा। उन्होंने खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन विद्यालयों की रिपोर्ट एक सप्ताह के बाद फिर से उपलब्ध कराई जाए।
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- हजारों बच्चों का भविष्य खतरे में
जिले के 44 विद्यालयों में करीब तीन हजार से अधिक बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। इन बच्चों के जुलाई में प्रवेश भी हो चुके हैं, अधिकतर अभिभावक फीस भी जमा कर चुके हैं। ऐसी स्थिति में विद्यालय बंद होने से बच्चों का भविष्य खतरे में है। विद्यालय बंद होने के बाद यह बच्चे कहां जाएंगे। बड़ी बात यह है कि अभिभावकों पर दोहरी मार पड़ेगी। वह यहां भी फीस जमा कर चुके हैं और अन्य स्कूलों में भी जमा करनी पड़ेगी। 15 स्कूलों के बच्चे प्रवेश लेने के लिए दूसरे स्कूलों में दौड़ रहे हैं। जबकि कुछ बच्चों का परिषदीय स्कूलों में प्रवेश हो गया है।
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जिन विद्यालयों को बंद कराया जाता है। उन विद्यालयों के बच्चों को पास के परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को बुलाकर प्रवेश दिलाया जाता है। पहले अभिभावकों से पूछा जाता है। अभिभावक मना कर देते हैं, तो वह अपने स्तर से मान्यता प्राप्त स्कूल में प्रवेश करा देते हैं। किसी भी बच्चे का भविष्य खराब होने नहीं दिया जाएगा।
पवन भाटी, खंड शिक्षा अधिकारी, भोजपुर
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